
कोरबा ( सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ ): एस.ई.सी.एल. (SECL) की अम्बिका परियोजना से प्रभावित ग्राम करतला के विस्थापितों और भू-स्वामियों की समस्याओं को लेकर आज कोरबा कलेक्टर कार्यालय में एक महत्वपूर्ण प्रदर्शन और बैठक आयोजित की गई। क्षेत्रीय विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम, विधायक प्रतिनिधि कुलदीप मरकाम और ग्राम पंचायत करतला के सरपंच ज्योतिष कुमार कुसरो की अगुवाई में बड़ी संख्या में एकत्रित ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर महोदय से मुलाकात की और उन्हें अपनी मांगों का एक विस्तृत 13 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।

सरकारी रिकॉर्ड की त्रुटियों से रुका है करोड़ों का मुआवजा
कलेक्टर को सौंपे गए आधिकारिक ज्ञापन के अनुसार, राजस्व अभिलेखों और एस.ई.सी.एल. की अर्जन पुस्तिका में गंभीर लिपिकीय व तकनीकी त्रुटियों के चलते स्थानीय आदिवासी और किसान अपने न्यायसंगत मुआवजे से वंचित हैं:
दस्तावेजों में नाम की विसंगति: प्रभावित ग्रामीण भागबली (पिता: धीरसाय) की अर्जन पुस्तिका में पिता का नाम ‘धीरसाय’ है, जबकि पर्ची, पैन कार्ड और पहचान पत्रों में ‘धीरपाल’ दर्ज है। यही समस्या भगमती (पिता: दरबार सिंह) और झलक सिंह के साथ भी बनी हुई है।
रकबा (जमीन की माप) में हेराफेरी: जोत कुँवर (पति: शिवसिंह) की जमीन पांचशाला आधिकारिक रिकॉर्ड में 0.28 एकड़ दर्ज है, जबकि अर्जन पुस्तिका में इसे केवल 0.05 एकड़ दर्शाया गया है। राजेंद्र (पिता: हुलास राम) की जमीन भी भुइँया पोर्टल में 0.30 एकड़ से घटकर मात्र 0.05 एकड़ रह गई है।
ऑनलाइन रिकॉर्ड हुआ शून्य: भू-स्वामी जयराम (पिता: महेशराम) की जमीन अर्जन पुस्तिका में 0.20 एकड़ दर्ज होने के बावजूद वर्तमान ऑनलाइन भुइँया पोर्टल पर 0.000 (शून्य) दिखाई दे रही है।
स्थानीय रोजगार की अनदेखी और फर्जी मकान सर्वे पर आक्रोश
सरपंच ज्योतिष कुमार कुसरो और पीड़ित ग्रामीणों ने ज्ञापन के माध्यम से एस.ई.सी.एल. प्रबंधन की दमनकारी नीतियों पर तीखा हमला बोला:
01. बाहरी लोगों को प्राथमिकता: खदान में प्रभावित गांव के पात्र युवाओं को नौकरी देने में भारी पक्षपात किया जा रहा है और बाहरी व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जा रही है।
02. कागजी और फर्जी मकान सर्वे: प्रभावितों का आरोप है कि पुनर्वास क्षेत्र में किया गया मकान सर्वे पूरी तरह फर्जी है। वास्तविक मकानों के स्थान पर दूसरे खसरा नंबरों पर मकानों को दर्शाकर कागजी खानापूर्ति की गई है। स्टाम्प पेपर पर किए गए वादों के बाद भी मुआवजा राशि नहीं दी जा रही है।
03. लापरवाह पटवारी को हटाने की मांग: पंचायत के हल्का पटवारी (सीताराम बंजारा) के हमेशा मुख्यालय से गायब रहने के कारण ग्रामीणों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए ‘पाली’ तहसील के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। ग्रामीणों ने उन्हें तत्काल पद से हटाने की मांग की है।
जनप्रतिनिधियों का कड़ा रुख और कलेक्टर का आश्वासन
इस अवसर पर विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम ने स्पष्ट रूप से कहा कि क्षेत्र के किसानों और आदिवासियों के हक की लड़ाई में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से पूरी पुनर्वास प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की।
जिला कलेक्टर ने ग्राम पंचायत के 13 सूत्रीय ज्ञापन को गंभीरता से स्वीकार करते हुए मौके पर उपस्थित अधिकारियों को निर्देशित किया कि खसरा पांचशाला रिकॉर्ड (2008-2012) के आधार पर सभी त्रुटियों का तत्काल मिलान कर सुधार किया जाए। उन्होंने आश्वासन दिया कि नियमों के तहत प्रत्येक प्रकरण का परीक्षण कर पात्र हितग्राहियों के साथ पूर्ण न्याय किया जाएगा।