कटघोरा को जिला बनाने की मांग: झमाझम बारिश के बीच वकीलों ने निकाली कार रैली, एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

​कटघोरा (सेन्ट्रल छत्तीसगढ़) कटघोरा को पूर्ण जिला का दर्जा दिए जाने की दशकों पुरानी मांग को लेकर अधिवक्ता संघ ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। क्षेत्र में हो रही मूसलाधार बारिश भी वकीलों के हौसले को डिगा नहीं सकी। बरसते मौसम के बीच अधिवक्ता संघ कटघोरा ने कसनिया स्थित अहरन नदी से एसडीएम कार्यालय तक एक विशाल कार रैली निकाली। रैली के समापन पर अधिवक्ताओं ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर कटघोरा को अविलंब जिला घोषित करने की मांग की।


​बारिश के कारण बाइक की जगह निकाली कार रैली


​अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि पूर्व निर्धारित योजना के तहत जिला बनाने की मांग को लेकर एक बड़ी बाइक रैली निकालने की तैयारी की गई थी। लेकिन लगातार हो रही झमाझम बारिश और खराब मौसम को देखते हुए रणनीति में बदलाव किया गया। आंदोलन की धार को कम न होने देने के संकल्प के साथ सभी अधिवक्ता अपनी-अपनी कारों में सवार हुए और कसनिया स्थित अहरन नदी के पास से रैली की शुरुआत की। कारों का यह काफिला नारेबाजी करते हुए कटघोरा एसडीएम कार्यालय पहुंचा।


​ज्ञापन में बताए कटघोरा को जिला बनाने के मजबूत आधार
​मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में अधिवक्ता संघ ने कटघोरा को जिला बनाने के पक्ष में कई ऐतिहासिक और प्रशासनिक तर्क प्रस्तुत किए हैं:


​ऐतिहासिक और न्यायिक पृष्ठभूमि: कटघोरा तहसील की स्थापना ब्रिटिश काल में सन् 1912 में हुई थी, जबकि यहाँ व्यवहार न्यायालय की स्थापना सन् 1963 से प्रभावी है।


​मौजूदा प्रशासनिक ढांचा: वर्तमान में यहाँ अतिरिक्त जिलाध्यक्ष (ADMs), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (Aps), डी.एफ.ओ. (DFO) कार्यालय, विद्युत विभाग का डी.ओ. कार्यालय स्थायी रूप से संचालित हैं। इसके अलावा अपर सत्र न्यायालय, विशेष पॉक्सो न्यायालय, कुटुंब न्यायालय और व्यवहार न्यायालय के कई पद यहाँ पहले से ही स्थापित हैं।


​जनता की परेशानियां और दूरी: कटघोरा जिला मुख्यालय न होने के कारण क्षेत्र के नागरिकों को छोटे-बड़े राजस्व और प्रशासनिक कार्यों के लिए जिला मुख्यालय कोरबा के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे उनका समय और धन दोनों बर्बाद होता है।


​औद्योगिक रूप से समृद्ध: कटघोरा अनुभाग के अंतर्गत

एस.ई.सी.एल. (SECL) की लगभग 10 से 12 कोयला खदानें संचालित हैं। साथ ही एन.टी.पी.सी. (NTPC), इंडियन ऑयल, हसदेव थर्मल पावर और बांगो थर्मल पावर जैसे देश के सबसे बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान इसी क्षेत्र में कार्यरत हैं।
​भौगोलिक अनुकूलता: कटघोरा अनुभाग के तहत पोड़ी उपरोड़ा, पसान, कटघोरा, दर्री, पाली, दीपका और हरदीबाजार जैसे बड़े क्षेत्र आते हैं। कटघोरा मुख्यालय में पर्याप्त शासकीय भूमि और जिला स्तर के बड़े कार्यालयों के निर्माण के लिए बुनियादी ढांचा व भवन पहले से मौजूद हैं।


​30 वर्षों से उठ रही मांग, 2 साल से जारी है क्रमिक धरना


​अधिवक्ता संघ ने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि कटघोरा को जिला बनाने की मांग आम जनता, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों द्वारा पिछले 30 से अधिक वर्षों से लगातार की जा रही है। इस मांग को लेकर विभिन्न संगठनों द्वारा पूर्व में उग्र प्रदर्शन और लगातार 2 वर्षों तक क्रमिक धरना भी दिया जा चुका है। वर्तमान में भी दिनांक 30 जनवरी 2026 से कलेक्ट्रेट बनाने की मांग को लेकर निरंतर क्रमिक धरना प्रदर्शन जारी है।


​इस अवसर पर अधिवक्ता संघ कटघोरा के अध्यक्ष राजेश पाल, उपाध्यक्ष मिहिर सिन्हा, सचिव यदुनंदन जायसवाल, सहसचिव बी. राम निषाद, कोषाध्यक्ष व्यास नारायण जायसवाल सहित भारी संख्या में अधिवक्ता, स्थानीय व्यवसायी और क्षेत्र के नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक सुर में कहा कि यदि सरकार इस बार कटघोरा की उपेक्षा करती है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।