पाली अस्पताल में जमीन पर बैठकर सलाइन लगाने का सच आया सामने; अस्पताल प्रबंधन और मां ने दी सफाई

पाली, छत्तीसगढ़: बीते दिनों पाली अस्पताल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें एक महिला अपने बीमार बच्चे को गोद में लेकर जमीन पर बैठी नजर आ रही थी और बच्चे को सलाइन (बोतल) चढ़ाया जा रहा था। इस वीडियो के सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर कई तरह के सवाल खड़े होने लगे थे। अब इस पूरे मामले में अस्पताल के डॉक्टर और खुद बच्चे की मां का बयान सामने आया है, जिन्होंने वायरल वीडियो के पीछे के सच का खुलासा करते हुए इसे पूरी तरह से ‘भ्रामक’ करार दिया है।

​अस्पताल प्रबंधन का खंडन: “इंस्टाग्राम रील के लिए बनाया गया वीडियो”

​अस्पताल के मुख्य चिकित्सक डॉ. लक्ष्मण कश्यप (MBBS, DGO) ने वीडियो पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अस्पताल प्रबंधन पर लगाए जा रहे सारे आरोप बेबुनियाद हैं।

  • क्या था मामला: डॉ. कश्यप ने बताया कि यह घटना बीते २० तारीख की सुबह करीब ८ बजे की है। बच्चा काफी बीमार था और दर्द से परेशान होकर रो रहा था। जब डॉक्टर और स्टाफ बच्चे को टेबल पर लिटाकर उसका इलाज और बोतल लगाने की प्रक्रिया कर रहे थे, तभी उसकी मां बच्चे को संभालने के लिए खुद ही नीचे बैठ गई।
  • सोशल मीडिया के लिए वीडियो: डॉक्टर ने आरोप लगाया कि बच्चे को सलाइन लगाने के दौरान ही उसके पिता ने चुपके से अपने मोबाइल से एक वीडियो क्लिप तैयार की, ताकि वे इसे अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट कर सकें।
  • अस्पताल की ओर से कानूनी कदम: डॉक्टर ने साफ किया कि जब उन्होंने पिता को ऐसा करते देखा, तो तुरंत मना किया और समझाया कि अस्पताल में इस तरह की भ्रामक चीजें नहीं फैलानी चाहिए। इसके बाद पिता ने वीडियो डिलीट भी कर दिया था, लेकिन यह बाद में कैसे वायरल हुआ, इसकी जांच के लिए अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि बच्चा वर्तमान में पूरी तरह सुरक्षित है और उसका इलाज अस्पताल में सुचारू रूप से चल रहा है।

​बच्चे की मां का बयान: “मैं अपनी मर्जी से नीचे बैठी थी”

​अस्पताल के वार्ड में भर्ती बच्चे की मां ने भी कैमरे के सामने आकर स्थिति स्पष्ट की है। जब उनसे पूछा गया कि वे जमीन पर क्यों बैठी थीं, तो उन्होंने बताया:

​”बच्चा बहुत रो रहा था और वह (टेबल या बेड पर) नहीं संभल रहा था। इसलिए मैं उसे संभालने के लिए खुद ही नीचे जमीन पर बैठ गई थी। अस्पताल वालों ने हमें नीचे बैठने के लिए नहीं कहा था।”

​जब महिला से पूछा गया कि वह वीडियो किसने बनाया, तो उसने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है कि वीडियो किसने बनाया और वायरल कर दिया, लेकिन अब अस्पताल में उनके बच्चे का इलाज बहुत अच्छे तरीके से हो रहा है।

​निष्कर्ष: भ्रामक खबरों से बचें

​इस पूरे मामले से साफ होता है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीर अधूरी सच्चाई बयां कर रही थी। बच्चे के रोने और मां द्वारा उसे जमीन पर बैठकर संभालने की स्थिति का गलत फायदा उठाकर किसी ने इसे अस्पताल की लापरवाही के रूप में पेश कर दिया। अस्पताल प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि मरीज को पूरा इलाज और सुविधाएं दी जा रही हैं और ऐसी भ्रामक खबरों पर जनता को ध्यान नहीं देना चाहिए।