महर्षि नारद जयंती सप्ताह: ‘अब बस्तर में नक्सलवाद नहीं, विकास पर हो चर्चा’ – डॉ. रमन सिंह

रायपुर/ सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ : छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार संघ द्वारा आयोजित ‘महर्षि नारद जयंती सप्ताह’ का भव्य समापन राजधानी रायपुर में दो गरिमामय सत्रों में हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह रहे। इस अवसर पर उन्होंने बस्तर और सरगुजा संभाग से आए पत्रकारों की सराहना करते हुए कहा कि जिन्होंने नक्सलवाद के दंश को करीब से देखा है, उन्हें अब बदलते बस्तर और वहां हो रहे विकास पर प्रमुखता से लिखना चाहिए।

  • छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार संघ का प्रांतीय आयोजन रायपुर में संपन्न
  • विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह मुख्य अतिथि, राज्य साहित्य अकादमी अध्यक्ष शशांक शर्मा ने की अध्यक्षता
  • प्रदेशभर से आए ग्रामीण पत्रकारों का हुआ सम्मान, अरविंद अवस्थी 8वीं बार बने प्रांतीय अध्यक्ष

​विधानसभा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की इच्छाशक्ति की तारीफ करते हुए कहा कि प्रदेश में नक्सलवाद अब अंतिम सांसें गिन रहा है। उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि वे नक्सलवाद और सलवा जुडूम जैसे संवेदनशील विषयों पर निष्पक्षता से लिखें, ताकि हिंसा में अपनों को खोने वाले परिवारों का दर्द समाज के सामने आ सके।

​डॉ. रमन सिंह को पत्रकारों का हितैषी बताया, ‘स्पीकर हाउस’ के दरवाजे खुले

​कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्य साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा ने की, जबकि मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

​डॉ. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष पद पर रिकॉर्ड आठवीं बार निर्वाचित होने पर श्री अरविंद अवस्थी तथा महासचिव श्री विश्व दीपक राई को बधाई दी। डॉ. सिंह ने हंसी-ठिठोली के अंदाज में अवस्थी जी को ‘आजीवन अध्यक्ष’ बने रहने की शुभकामना भी दी। साथ ही, उन्होंने घोषणा की कि ‘स्पीकर हाउस’ का साहित्यिक हॉल पत्रकारों और साहित्यकारों के लिए हमेशा खुला है, जहाँ वे पुस्तक विमोचन व साहित्यिक विमर्श कर सकते हैं।

​”रमन सिंह के कार्यकाल में थी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता”

​विशिष्ट अतिथि और मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा ने महर्षि नारद को भारतीय पत्रकारिता का आदि पुरुष बताते हुए रामायण कालीन प्रसंगों का जिक्र किया। उन्होंने कहा:

​”पत्रकारिता में असली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता डॉ. रमन सिंह के 15 वर्षों के कार्यकाल में देखने को मिलती थी, जहाँ वे सरकार की झूठी आलोचनाओं को भी सहजता से टाल देते थे। पिछले 5 वर्षों में पत्रकारों ने जो घुटन महसूस की, वैसी स्थिति रमन सरकार में कभी नहीं रही।”

​संघ के प्रांतीय अध्यक्ष अरविंद अवस्थी ने स्वागत भाषण में डॉ. रमन सिंह को पत्रकार जगत का अभिभावक बताया और कहा कि वे हमेशा पत्रकारों को अपने परिवार का हिस्सा मानते आए हैं।

​प्रथम सत्र: ‘टूटते परिवारों को बचाना भी पत्रकारों की सामाजिक जिम्मेदारी’

​इससे पहले, कार्यक्रम के प्रथम सत्र का आयोजन वृंदावन हॉल में हुआ, जिसके मुख्य अतिथि रायपुर उत्तर के विधायक पुरंदर मिश्रा थे। श्री मिश्रा ने पत्रकारिता को समाज का चौथा स्तंभ बताते हुए राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत करने में इसकी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने मोबाइल के अत्यधिक उपयोग और टूटते परिवारों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा:

​”आज लोग मोबाइल में व्यस्त होकर परिवारों से दूर हो रहे हैं। कम से कम एक वक्त का भोजन पूरे परिवार को साथ करना चाहिए। इस सामाजिक बिखराव को रोकने में भी पत्रकारों को अपनी भूमिका निभानी होगी।”

​विशिष्ट अतिथि और भाजपा प्रदेश प्रवक्ता गौरी शंकर श्रीवास ने कहा कि पत्रकार सिर्फ श्रमजीवी नहीं, बल्कि अत्यंत स्वाभिमानी होते हैं। विषम परिस्थितियों में भी वे सूचना क्रांति के अग्रदूत बनकर काम करते हैं।

​ग्रामीण पत्रकारों का साल-श्रीफल से सम्मान

​इस राज्य स्तरीय आयोजन में छत्तीसगढ़ के कोने-कोने (जिलों, तहसीलों और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों) से सैकड़ों पत्रकार रायपुर पहुंचे थे। कार्यक्रम में ग्रामीण अंचल के पत्रकारों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए साल, श्रीफल और मोमेंटो भेंटकर सम्मानित किया गया। प्रथम सत्र का संचालन वरिष्ठ पत्रकार राजेश मिश्रा ने किया तथा आभार प्रदर्शन महासचिव विश्व दीपक राई ने किया।

​कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित:

​भव्य आयोजन में प्रांतीय पदाधिकारी अनिल पवार, मनोज मिश्रा (बसना), राजू दरयानी (सक्ति), भरत योगी, अब्बास अली (सारंगढ़), पारस शर्मा (कवर्धा), निर्मल सलूजा (पंडरिया), राम साहू, अवधेश मिश्रा, मनमोहन नेताम (देवभोग), रवि शुक्ला (बिलासपुर), रेनू मिश्रा, विनोद शर्मा (कोरिया), छगन साहू, संतोष ताम्रकार, नूतन गुप्ता सहित कई वरिष्ठ पत्रकार उपस्थित थे।

​इसके साथ ही प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए जिला अध्यक्षगण भी शामिल हुए, जिनमें प्रमुख रूप से:

श्याम किशोर शर्मा (गरियाबंद), कम्मू सरदार (कोंडागांव), पिसा राजन (सुकमा), घनश्याम यादव (बीजापुर), आजाद सक्सेना (दंतेवाड़ा), कौशल संधुजा (जगदलपुर), देवेंद्र यादव (पामगढ़), मनोज थवाईत (जांजगीर), श्याम अग्रवाल (सक्ति), संतोष ठाकुर (बिलासपुर), शशिकांत डिक्सेना (कोरबा), ओम गभेल (कोरबा), रामबरन वाल (मनेन्द्रगढ़), राजकुमार देवांगन (मुंगेली), गोल्डी नायक (सारंगढ़), मनमोहन ठाकुर (रायगढ़), सुरेश गुप्ता (सरगुजा), राम साहू (राजनांदगांव), ललित साहू (दुर्ग), जितेंद्र शुक्ला (बेमेतरा) एवं लोकेश जैन (चारामा) शामिल रहे।