
बिलासपुर / सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ : छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ (बिलासपुर संभाग) ने वन विभाग में हो रहे कथित नियम विरुद्ध स्थानांतरणों और कार्य आवंटन को लेकर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। संघ ने मुख्य वन संरक्षक (CCG) को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर उनकी समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया, तो संभाग के समस्त वन कर्मचारी चरणबद्ध आंदोलन और धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
प्रमुख आपत्तियां और विवाद का कारण
संघ द्वारा जारी पत्र में मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर आपत्ति जताई गई है:
- स्थानांतरण नीति का उल्लंघन: संघ का आरोप है कि शासन द्वारा प्रतिबंधित अवधि के दौरान भी क्षेत्रीय अमले (वनक्षेत्रपाल से वनरक्षक तक) के तबादले किए जा रहे हैं। पत्र में उल्लेख है कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा इन तबादलों पर पूर्व में ही असहमति जताई गई थी, फिर भी नियमों को ताक पर रखकर आदेश जारी किए जा रहे हैं।
- अनावश्यक कार्य आवंटन: संघ के अनुसार, स्थानीय कार्यालयों द्वारा कार्य संपादन के नाम पर मनमाने तरीके से कर्मचारियों को इधर-उधर किया जा रहा है, जो कि स्थापित स्थानांतरण नीति के विपरीत है।
- संवादहीनता का आरोप: कर्मचारी संघ ने नाराजगी जाहिर की है कि पिछली परामर्शदात्री बैठकों और मौखिक चर्चाओं के बावजूद प्रशासन ने उनकी मांगों पर कोई सार्थक पहल नहीं की है।
7 दिन का अल्टीमेटम
छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ के संभागीय अध्यक्ष प्रीतम कुमार पुराईन ने स्पष्ट किया है कि यदि एक सप्ताह के भीतर इन विवादित आदेशों को निरस्त नहीं किया गया, तो बिलासपुर वृत्त के सभी कर्मचारी एक दिवसीय सांकेतिक धरना प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद भी समाधान न होने पर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
इन अधिकारियों को भेजी गई प्रतिलिपि
मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पत्र की प्रतियां प्रधान मुख्य वन संरक्षक (रायपुर), संभागायुक्त बिलासपुर, आईजी, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित सभी संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई हैं।