पाली में बिजली संकट: नाम का ‘ऊर्जाधानी’ जिला, रात होते ही अंधेरे और उमस के साये में जीने को मजबूर ग्रामीण

पाली ( सेंट्रल छत्तीसगढ़ कोरबा) जितेंद्र गुप्ता ब्यूरो रिपोर्ट.. छत्तीसगढ़ को ‘ऊर्जाधानी’ का गौरव हासिल है, लेकिन इसी ऊर्जाधानी का एक हिस्सा आज भीषण गर्मी में अंधकार और सरकारी सिस्टम की बेरुखी झेलने को मजबूर है। पाली विकासखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली विभाग के ‘मेंनटेनेंस’ का खेल ग्रामीणों पर भारी पड़ रहा है। बिना मौसम खराब हुए भी घंटों बिजली गुल रहना अब यहाँ की नियति बन चुकी है। आलम यह है कि दिन तो जैसे-तैसे कट जाता है, लेकिन रात होते ही अघोषित बिजली कटौती ग्रामीणों के लिए किसी सजा से कम नहीं साबित हो रही है।

​80 पंचायतों में हाहाकार: बच्चे और बुजुर्ग बेहाल

​पाली ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली लगभग 80 पंचायतों के ग्रामीण इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ मई की झुलसाने वाली गर्मी और दूसरी तरफ बिजली विभाग की अघोषित कटौती। रात के समय बिजली गुल होने से छोटे बच्चे और बुजुर्ग उमस और गर्मी से तड़प उठते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली बंद होने के बाद कब आएगी, इसकी कोई गारंटी नहीं होती।

​मेंटेनेंस के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति?

​हैरानी की बात यह है कि जब भी बिजली गुल होने का कारण पूछा जाता है, तो जवाब मिलता है—”मेंनटेनेंस का काम चल रहा है।” ग्रामीणों का सवाल है कि अगर साल भर मेंटेनेंस का काम चलता है, तो गर्मी आते ही लाइनें क्यों जवाब दे जाती हैं? बिना आंधी-तूफान या मौसम खराब हुए भी घंटों बिजली बंद रहना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

​ठेकेदारों की मनमानी और अधिकारियों की उदासीनता

​ग्रामीणों का आरोप है कि इस बदहाली के पीछे बिजली विभाग के अधिकारियों की उदासीनता और ठेकेदारों की घोर मनमानी है।

  • सुस्त रवैया: सब-स्टेशनों और वितरण लाइनों की देखरेख करने वाले जिम्मेदार अधिकारी दफ्तरों से बाहर नहीं निकलते।
  • लापरवाह ठेकेदार: मेंटेनेंस का जिम्मा संभालने वाले ठेकेदार काम में लापरवाही बरत रहे हैं, जिससे आए दिन तकनीकी फॉल्ट आते हैं।
  • सुनाई न देना: ग्रामीण जब अपनी शिकायत लेकर अधिकारियों के पास फोन करते हैं, तो या तो फोन उठता नहीं और अगर उठता है तो गोल-मोल जवाब देकर पल्ला झाड़ लिया जाता है।