जशपुर। जशपुर जिले के दोकड़ा गांव में आयोजित ऐतिहासिक भगवान श्री जगन्नाथ रथयात्रा एक बार फिर आस्था और परंपरा का साक्षी बनी। करीब आठ दशक से चली आ रही इस परंपरा में इस वर्ष मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गजपति महाराजा की भूमिका निभाते हुए भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने हजारों श्रद्धालुओं के साथ रथ की रस्सी थामकर यात्रा का शुभारंभ किया।

रथयात्रा शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री ने अपनी धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ पारंपरिक छेरा पहरा की रस्म निभाई। सोने की झाड़ू से रथ मार्ग का प्रतीकात्मक मार्जन और चंदन मिश्रित पवित्र जल का छिड़काव कर उन्होंने सेवा, समर्पण और विनम्रता का संदेश दिया।
1942 से कायम है दोकड़ा की परंपरा
मुख्यमंत्री ने कहा कि दोकड़ा की रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर है। वर्ष 1942 से चली आ रही यह परंपरा आज भी जनआस्था का केंद्र बनी हुई है। मंदिर के जीर्णोद्धार और वर्ष 2025 में हुई प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह दूसरी भव्य रथयात्रा आयोजित की गई।

जगन्नाथ संस्कृति से जुड़ा है छत्तीसगढ़ का रिश्ता
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान जगन्नाथ के साथ छत्तीसगढ़ का संबंध सदियों पुराना है। उन्होंने देवभोग के चावल का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भी पुरी धाम के महाप्रसाद में इसका उपयोग किया जाता है, जो दोनों क्षेत्रों के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक है।
प्रदेश की खुशहाली और किसानों के लिए मांगा आशीर्वाद
मुख्यमंत्री ने भगवान श्री जगन्नाथ से प्रदेश में भरपूर वर्षा, अच्छी फसल, किसानों की समृद्धि और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्ध जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपराएं समाज को जोड़ने के साथ सेवा और समानता का संदेश भी देती हैं।
भक्ति के रंग में रंगा पूरा दोकड़ा
ओडिशा से आई कीर्तन मंडलियों के भजन, शंखनाद, ढोल-मृदंग और हरिनाम संकीर्तन के बीच रथयात्रा निकली। महिलाओं, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित हजारों श्रद्धालुओं ने रथ की रस्सी खींचकर भगवान जगन्नाथ के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। पूरा दोकड़ा गांव दिनभर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
कार्यक्रम में पद्मश्री जागेश्वर यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा, जनप्रतिनिधि, आयोजन समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।