शिवाय हॉस्पिटल कोरबा फिर सवालों के घेरे में, पत्नी के उपचार को लेकर विकास अग्रवाल ने लगाए गंभीर आरोप; पूर्व शिकायतों पर भी उठाए सवाल

कोरबा। सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ : जिले के चर्चित शिवाय हॉस्पिटल को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। इस बार मामला शिकायतकर्ता विकास अग्रवाल की पत्नी के उपचार से जुड़ा हुआ है। अस्पताल में उपचार कराने के बाद सामने आई स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं को लेकर विकास अग्रवाल ने अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

शिकायतकर्ता विकास अग्रवाल के अनुसार, उन्होंने अपनी पत्नी का उपचार शिवाय हॉस्पिटल में कराया था। लेकिन उपचार के बाद भी उनकी पत्नी की परेशानी कम नहीं हुई। उनका आरोप है कि ऑपरेशन के लगभग तीन महीने बाद पेट में मवाद होने की बात सामने आई। इसके बाद कराए गए सीटी स्कैन की रिपोर्ट को लेकर भी उन्होंने गंभीर चिंता जताई है। इस पूरे मामले से संबंधित मेडिकल दस्तावेज और वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें शिकायतकर्ता अपनी आपबीती और उपचार से जुड़े सवाल उठा रहे हैं।

पहले भी हो चुकी हैं शिकायतें

शिवाय हॉस्पिटल को लेकर यह पहला मामला नहीं है, जब अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी अस्पताल से संबंधित अलग-अलग घटनाओं और शिकायतों को लेकर जिला कलेक्टर एवं जिला चिकित्सा अधिकारी को लिखित शिकायतें किए जाने की बात सामने आई है। लगातार शिकायतों के बावजूद यदि मरीजों को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, तो यह स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।

अब विकास अग्रवाल के मामले ने एक बार फिर अस्पताल की उपचार व्यवस्था और मरीजों के प्रति जवाबदेही को चर्चा में ला दिया है। सवाल यह है कि पूर्व में की गई शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई? क्या संबंधित मामलों की जांच कराई गई? और आखिर मरीजों को बेहतर एवं सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी कौन तय करेगा?

स्वास्थ्य विभाग की जांच पर टिकी निगाहें

मामले में अब जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। शिकायतकर्ता की ओर से सामने रखे गए आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और उपचार से संबंधित दस्तावेजों की विशेषज्ञ चिकित्सकों से निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई हो।

फिलहाल इस मामले में शिवाय हॉस्पिटल प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

अब बड़ा सवाल यह है कि मरीजों के उपचार से जुड़े ऐसे मामलों में स्वास्थ्य विभाग कब गंभीरता से कार्रवाई करेगा और मरीजों को न्याय कब मिलेगा?