महीने में 2 दिन हाजिरी, बाकी दिन भ्रष्टाचार की ‘सांठगांठ’? पोंडीउपरोड़ा में सचिव संघ अध्यक्ष की कार्यशैली पर उठे तीखे सवाल

कोरबा ( सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ ) :कोरबा जिले के आदिवासी बाहुल्य विकासखंड पोंडीउपरोड़ा अंतर्गत ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक कार्यप्रणाली पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है, जहां पाली और पाथा ग्राम पंचायत के सचिव मोहम्मद हसन की निरंतर अनुपस्थिति, शासकीय योजनाओं की राशि में कथित बंदरबांट तथा उच्चाधिकारियों के साथ सांठगांठ के गंभीर आरोपों ने समूचे प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि राज्य शासन की स्पष्ट गाइडलाइन के अनुसार निर्धारित समय-सीमा पूर्ण होने के उपरांत अनिवार्य स्थानांतरण की नीति को ताक पर रखकर वर्षों से एक ही क्षेत्र में जमे रहना और विभागीय अधिकारियों की शह पर भ्रष्टाचार के सिद्ध मामलों में भी दंड से बचे रहना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि व्यवस्था में जवाबदेही पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।

​महीने में एकाध दिन दर्शन, योजनाओं के बजट में बंदरबांट का आरोप

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पंचायत सचिव का अपने दायित्व वाले कार्यक्षेत्र से महीनों नदारद रहना अब एक सामान्य परिपाटी बन चुका है और महीने में बमुश्किल एक-दो दिन औपचारिक उपस्थिति दर्ज कराकर वे गायब हो जाते हैं, जिसके चलते मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, पेंशन स्वीकृति तथा मूलभूत निर्माण कार्यों का संचालन पूरी तरह अधर में लटक गया है। इतना ही नहीं, ग्रामीणों और जागरूक जनप्रतिनिधियों ने यह सनसनीखेज आरोप भी लगाया है कि पंचायत में स्वीकृत विकास कार्यों की शासकीय निधियों को मिलीभगत के जरिए कागजों में ही पूर्ण दिखाकर भारी वित्तीय अनियमितता और बंदरबांट की जा रही है, जिससे आम जनता अपने बुनियादी अधिकारों व आवश्यक दस्तावेजों के लिए जनपद पंचायत कार्यालय से लेकर ग्राम पंचायत भवन तक अंतहीन चक्कर काटने को विवश है।

​भ्रष्टाचार साबित होने के बाद भी अभयदान, ट्रांसफर गाइडलाइन की खुली अवहेलना

ग्रामीणों ने तीखे लहजे में सवाल उठाया कि पूर्व में लालपुर पंचायत में पदस्थापना के दौरान भी सचिव के विरुद्ध गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों और कर्तव्य में घोर लापरवाही के प्रमाण सामने आए थे, किंतु ठोस प्रशासनिक कार्रवाई करने के बजाय उन फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारियों और प्रशासनिक अमले के साथ मजबूत गठजोड़ के दम पर न केवल हर जांच को निष्प्रभावी कर दिया जाता है, बल्कि सामान्य स्थानांतरण नियमों को दरकिनार करते हुए लगातार मलाईदार प्रभार बनाए रखने का खुला खेल खेला जा रहा है, जिससे यह धारणा पुख्ता हो रही है कि भ्रष्टाचार के प्रमाणित मामलों के बावजूद रसूखदारों को प्रशासनिक अभयदान प्राप्त है।

​सचिव संघ के पद का रसूख और सांठगांठ की जांच की मांग

ब्लॉक सचिव संघ के अध्यक्ष पद पर आसीन होने के कारण इस प्रभाव का उपयोग विभागीय दबाव बनाने और स्थानीय स्तर पर होने वाली शिकायतों को दबाने के लिए किए जाने की चर्चाएं भी जोरों पर हैं। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि संगठन का दायित्व किसी लोकसेवक को कर्तव्य से बचने या नियमों की धज्जियां उड़ाने का विशेषाधिकार नहीं देता। क्षेत्रवासियों ने अब जिला प्रशासन व संभाग स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों से यह मांग की है कि कथित वित्तीय बंदरबांट, वर्षों से एक ही क्षेत्र में टिके रहने के प्रशासनिक गठजोड़ और पूर्व में सिद्ध हो चुके मामलों पर तत्काल संज्ञान लेकर स्वतंत्र विजिलेंस जांच कराई जाए तथा नियमों की अवहेलना करने वाले दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।