​कटघोरा में प्रशासनिक आदेशों की धज्जियां: ‘नो एंट्री’ में धड़ल्ले से दौड़ रहे भारी वाहन, मूकदर्शक बनी पुलिस और यातायात विभाग

 सेन्ट्रल छत्तीसगढ़/कटघोरा/कोरबा शहर में इन दिनों प्रशासनिक आदेश सिर्फ कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) द्वारा जन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शहर के भीतर दिन के समय भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध (नो एंट्री) लगाया गया है, लेकिन धरातल पर इस आदेश की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि स्थानीय पुलिस और यातायात विभाग इस पूरे मामले पर मूकदर्शक बने बैठे हैं, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है।

​क्या है नियम और कैसे हो रही अनदेखी?

कोरबा जिले के कटघोरा और मुख्य शहरी क्षेत्रों में आम जनता की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए भारी वाहनों (जैसे 6-चक्का या उससे बड़े ट्रक, ट्रेलर, कंक्रीट मिक्सर और कैप्सूल) के लिए दिन के समय ‘नो-एंट्री’ लागू की गई है। यह प्रतिबंध सुबह 8:00 बजे से लेकर रात 10:00 बजे तक प्रभावी रहता है। नियम के अनुसार, भारी वाहनों को केवल देर रात 10:00 बजे से सुबह 7:00 या 8:00 बजे के बीच ही शहर से गुजरने या माल अनलोड करने की अनुमति है।

​लेकिन तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि इस नियम को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है।

  • ​तस्वीर-1 (image_0.png) में: शहर की मुख्य व्यस्त सड़क पर, जहां दोपहिया वाहनों और आम राहगीरों की भारी भीड़ है, वहाँ दिन के उजाले में एक विशाल ट्रेलर/डंपर यातायात के बीचों-बीच धड़ल्ले से चल रहा है। इससे न सिर्फ जाम की स्थिति बन रही है, बल्कि कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
  • ​तस्वीर-2 (image_1.png) में: शहर की तंग गलियों और रिहायशी मोहल्लों (गली-मोहल्लों) को भी नहीं बख्शा जा रहा है। एक बड़ा कंक्रीट मिक्सर (कैप्सूल) वाहन रिहायशी इलाके की कच्ची और संकरी सड़क पर बिना किसी डर के खड़ा और संचालित होता दिख रहा है, जहां बच्चे खेलते हैं और आम लोगों का आना-जाना लगा रहता है।

​व्यापारियों की मनमानी और पुलिस की उदासीनता

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कटघोरा नगर के कुछ रसूखदार व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों द्वारा अपने निजी फायदे के लिए इस ‘नो एंट्री’ नियम की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उनके भारी वाहन बिना किसी रोक-टोक के दिन के समय शहर और मोहल्लों में प्रवेश कर रहे हैं।

​मोहल्लेवासियों का कहना है कि भारी वाहनों के इस तरह रिहायशी इलाकों में आने से न केवल सड़कें खराब हो रही हैं, बल्कि चौबीसों घंटे हादसों का डर बना रहता है। लोग इस बात से बेहद परेशान और डरे हुए हैं।

​हादसे के बाद ही जागेगा प्रशासन?

सवाल यह उठता है कि जब एसडीएम का स्पष्ट आदेश है, तो पुलिस और यातायात विभाग की चौकियां इन भारी वाहनों को शहर की सीमा में प्रवेश करने से क्यों नहीं रोक पा रही हैं? क्या पुलिस और यातायात अमला किसी बड़ी दुर्घटना या मासूम की जान जाने का इंतजार कर रहा है? स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस मामले में तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए, नो एंट्री का सख्ती से पालन कराया जाए और नियम तोड़ने वाले वाहनों व व्यापारियों पर भारी जुर्माना लगाया जाए, ताकि कटघोरा की सड़कों और गलियों को सुरक्षित बनाया जा सके।