हाथी-मानव द्वंद्व रोकने और शावकों के संरक्षण के लिए दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ

रायगढ़ ( सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ ) आज ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ के विशेष अवसर पर छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण और मानव-हाथी सह-अस्तित्व की दिशा में एक बड़ी और ऐतिहासिक पहल की गई है। माननीय मुख्यमंत्री जी के कुशल निर्देशन एवं माननीय वनमंत्री जी के गरिमामयी मार्गदर्शन में, तथा आदरणीय पीसीसीएफ (PCCF) एवं वन बल प्रमुख के कुशल नेतृत्व में ‘हाथी-मानव द्वंद्व’ को कम करने के उद्देश्य से एक उच्च स्तरीय दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।

​इस विशेष कार्यशाला का मुख्य फोकस हाथी-मानव टकराव को रोकना और विशेष रूप से रायगढ़ जिले में हाल के दिनों में हाथी शावकों (Elephant Calves) की हो रही असमय मृत्यु दर पर प्रभावी अंकुश लगाना है।

​देश भर के ख्यातिलब्ध वैज्ञानिक और विशेषज्ञ हुए शामिल

​इस दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें देश भर के जाने-माने वन्यजीव वैज्ञानिक (Wildlife Scientists) और वरिष्ठ पशु चिकित्सा वैज्ञानिक (Veterinary Experts) शिरकत कर रहे हैं। ये विशेषज्ञ मैदानी स्तर पर आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों, हाथियों के व्यवहार और उनके चिकित्सा प्रबंधन को लेकर अपने शोध तथा अनुभव साझा करेंगे।

​कार्यशाला के मुख्य बिंदु और कार्ययोजना:

  • मैदानी अधिकारियों का समन्वय: इस कार्यशाला में प्रदेश के सभी हाथी-प्रभावित जिलों के वनमंडलाधिकारी (DFO) और विशेषज्ञ पशु चिकित्सक (Veterinary Doctors) एक मंच पर उपस्थित हैं, ताकि एक बेहतर ग्राउंड-प्लान तैयार किया जा सके।
  • शावकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान: रायगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में हाथी शावकों की सुरक्षा, उनकी ट्रैकिंग और बीमार या घायल शावकों को त्वरित व आधुनिक चिकित्सा सहायता प्रदान करने पर विस्तृत रणनीति बनाई जा रही है।
  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण: देश के शीर्ष वैज्ञानिकों की उपस्थिति से हाथियों के कॉरिडोर प्रबंधन, उनके भोजन-पानी की उपलब्धता और रेडियो कॉलरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर भी मंथन किया जा रहा है।