विष्णु भैया की सोच, ओपी चौधरी का विजन और RDA की नई उड़ान! अब ड्रोन से होगा संपत्तियों का सर्वे, डिजिटल रिकॉर्ड से बदलेगा प्रॉपर्टी मैनेजमेंट का पूरा सिस्टम

रायपुर, 29 सितंबर 2026। रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) अपनी संपत्तियों और विकास योजनाओं के प्रबंधन को नई तकनीक से जोड़ने जा रहा है। प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में मौजूद भूखंडों, आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों तथा सार्वजनिक अधोसंरचनाओं का GIS आधारित डिजिटल मैप तैयार करने के साथ हाईटेक ड्रोन सर्वे किया जाएगा। इसके साथ ही पुराने कागजी रिकॉर्ड को डिजिटल स्वरूप देकर प्रत्येक संपत्ति को यूनिक प्रॉपर्टी आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी UPIN से जोड़ा जाएगा।

इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य RDA की संपत्तियों की वास्तविक स्थिति और पुराने रिकॉर्ड को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना है। RDA की आधिकारिक वेबसाइट पर भी GIS आधारित एसेट मैपिंग, सर्वे, डिजिटाइजेशन और मॉनिटरिंग सिस्टम से संबंधित प्रक्रिया दर्ज है। 1

मुख्यमंत्री साय के विजन से डिजिटल गवर्नेंस को गति

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में सरकारी सेवाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में RDA की यह परियोजना संपत्ति प्रबंधन को कागजी व्यवस्था से निकालकर डिजिटल सिस्टम से जोड़ने की पहल के रूप में सामने आई है।

आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने इसे नागरिक सेवाओं के डिजिटलीकरण और सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका कहना है कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से रिकॉर्ड अधिक व्यवस्थित होंगे और भविष्य में नागरिकों को मिलने वाली सेवाओं को ज्यादा सुविधाजनक बनाया जा सकेगा।

एक संपत्ति, एक डिजिटल पहचान

नई व्यवस्था में RDA की प्रत्येक संपत्ति और भूखंड को अलग UPIN दिया जाएगा। यह नंबर संबंधित संपत्ति के डिजिटल रिकॉर्ड और GIS मैप से लिंक रहेगा। इससे किसी संपत्ति की स्थिति, सीमा, क्षेत्रफल और उपयोग से जुड़ी जानकारी को एकीकृत तरीके से सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

RDA पहले से ही ऑनलाइन संपत्ति संबंधी सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है और अपनी वेबसाइट पर प्रॉपर्टी सर्च तथा ऑनलाइन बुकिंग जैसी सेवाएं संचालित करता है। 2

ड्रोन के साथ डोर-टू-डोर सत्यापन

सिर्फ आसमान से तस्वीरें लेकर मैप तैयार नहीं किया जाएगा। परियोजना में हाई-रिजॉल्यूशन ड्रोन सर्वे के साथ मौके पर भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा। सर्वे टीम घर-घर जाकर आवश्यक जानकारी जुटाएगी और मोबाइल एप के माध्यम से जियो-टैग्ड फोटो तथा संपत्ति से जुड़ा डेटा दर्ज करेगी।

इसके बाद मौके से मिले डेटा का पुराने रजिस्टर, लेजर बुक, नक्शे, पट्टा और लीज संबंधी रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा। इस प्रक्रिया से कागजों में दर्ज जानकारी और जमीन पर मौजूद वास्तविक स्थिति के बीच अंतर को चिन्हित करने में सहायता मिलेगी।

कब्जे और रिकॉर्ड की विसंगतियों पर भी नजर

डिजिटल मैपिंग पूरी होने के बाद RDA के पास अपनी जमीन और संपत्तियों का एक व्यापक डिजिटल डेटाबेस उपलब्ध होगा। इससे संपत्ति की सीमा और उपयोग की निगरानी आसान हो सकती है। वहीं पुराने दस्तावेजों और मौके की स्थिति के मिलान से अनधिकृत कब्जे अथवा रिकॉर्ड से जुड़ी विसंगतियों की पहचान में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

नामांतरण से NOC तक ऑनलाइन सेवाओं का रास्ता

इस डिजिटल डेटाबेस का फायदा केवल RDA के आंतरिक प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में नामांतरण, लीज नवीनीकरण, भवन अनुज्ञा और NOC जैसी प्रक्रियाओं को ज्यादा व्यवस्थित एवं ऑनलाइन बनाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

सड़क, नाली, ड्रेनेज, स्ट्रीट लाइट और जलापूर्ति जैसी सार्वजनिक अधोसंरचनाओं की जानकारी भी GIS सिस्टम में शामिल की जाएगी। इससे रखरखाव और भविष्य की विकास योजनाओं के लिए एक डिजिटल आधार तैयार होगा।

छह चरणों में तैयार होगा डिजिटल एसेट डेटाबेस

परियोजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। पहले पुराने दस्तावेजों और नक्शों का डिजिटलीकरण होगा। इसके बाद ड्रोन से हाई-रिजॉल्यूशन मैपिंग, डोर-टू-डोर सत्यापन और जियो-टैगिंग की प्रक्रिया होगी। इसके बाद सभी डेटा को GIS प्लेटफॉर्म पर एकीकृत कर वेब आधारित एसेट मैनेजमेंट सिस्टम से जोड़ा जाएगा।

RDA की संपत्तियों का होगा तकनीक आधारित प्रबंधन

RDA अध्यक्ष नंद कुमार साहू के अनुसार, GIS मैपिंग और डिजिटल रिकॉर्ड से प्राधिकरण की संपत्तियों से जुड़ी जानकारी को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाया जा सकेगा। वहीं RDA उपाध्यक्ष डॉ. जे.पी. शर्मा और मुख्य कार्यपालन अधिकारी अवनीश कुमार शरण ने भी परियोजना को संपत्ति प्रबंधन और नागरिक सेवाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में उपयोगी पहल बताया है।

RDA ने सर्वे के दौरान नागरिकों से सहयोग की अपील की है। प्राधिकरण के अनुसार अधिकृत सर्वे टीम के कर्मचारियों के पास पहचान-पत्र रहेगा और नागरिकों से आवश्यक जानकारी एवं माप संबंधी कार्य में सहयोग करने को कहा गया है।

यानी आने वाले समय में RDA की संपत्ति का रिकॉर्ड सिर्फ फाइलों और रजिस्टरों में नहीं, बल्कि ड्रोन मैप, GIS लोकेशन और यूनिक डिजिटल पहचान के साथ एकीकृत सिस्टम में दिखाई देगा।