
कोरबा / सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ : छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश भर में चलाए जा रहे ‘सुशासन तिहार’ कार्यक्रम को लेकर अब राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दल ने सरकार के दावों को पूरी तरह से खोखला बताते हुए इसे सिर्फ एक राजनीतिक प्रोपेगैंडा करार दिया है। कोरबा में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान विपक्ष के नेता ने कलेक्ट्रेट में उमड़ रही ग्रामीणों की भारी भीड़ का हवाला देते हुए शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सुशासन तिहार के शिविरों से खाली हाथ लौट रहे ग्रामीण
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए वक्ता ने कहा कि पिछले ३५ से ४० दिनों से पूरे छत्तीसगढ़ में सरकार सुशासन तिहार मनाने का ढोंग कर रही है। इसमें प्रदेश के तमाम मंत्री और पूरा प्रशासनिक अमला लगा हुआ है। सरकार की ओर से यह बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे कि ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान कर दिया जाएगा। लेकिन आज सोमवार को कोरबा कलेक्ट्रेट में आयोजित ‘जनदर्शन’ कार्यक्रम में उमड़ी ग्रामीणों की भारी भीड़ ने सरकार के इन दावों की पोल खोल कर रख दी है। कलेक्ट्रेट में लगी यह भीड़ साफ बयां करती है कि सुशासन तिहार के शिविरों में ग्रामीणों का कोई काम नहीं हुआ है।
मंत्रियों पर से उठा भरोसा, कलेक्ट्रेट की ओर रुख कर रहे लोग
बयान में सरकार पर तंज कसते हुए कहा गया कि इस स्थिति के दो ही पहलू हो सकते हैं। पहला तो यह कि सुशासन शिविरों में ग्रामीणों की समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। दूसरा यह कि अब ग्रामीणों को सरकार के मंत्रियों और उनके बड़े-बड़े वादों पर जरा भी भरोसा नहीं रह गया है। लोगों को मंत्रियों से ज्यादा जिला कलेक्टर पर विश्वास है, यही वजह है कि ग्रामीण अपनी फरियाद लेकर भारी तादाद में कलेक्ट्रेट पहुंचने को मजबूर हैं।
पूर्ववर्ती सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं बंद, युवा और महिलाएं परेशान
वर्तमान सरकार की नीतियों पर प्रहार करते हुए वक्ता ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की समस्या और आर्थिक संसाधनों का संकट आज भी जस का तस बना हुआ है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार का उदाहरण देते हुए कहा:
”हमारी सरकार में गोठान, महिला स्व-सहायता समूह, गोबर खरीदी और राजीव मितान क्लब जैसी योजनाओं के माध्यम से हर गांव में पैसा पहुंचता था। युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों को महीने में ₹१०,००० से लेकर ₹५०-६०,००० तक की राशि शासन की ओर से मिलती थी। लेकिन इस सरकार ने उन सभी जनहितैषी राशियों और योजनाओं को बंद कर दिया है। अब सरकार यह बताने की स्थिति में भी नहीं है कि आखिर वह पैसा जा कहां रहा है?”
अधिकारियों पर ठीकरा फोड़ रही सरकार, कानून व्यवस्था चरमराई
विपक्ष ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ का पूरा शासन तंत्र और सिस्टम फेल हो चुका है। सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए इसका सारा दोष प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के सिर मढ़ रही है। इसी हताशा और ‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ जैसी स्थिति के कारण प्रदेश में अराजकता का माहौल है। आज छत्तीसगढ़ में कहीं तहसीलदार को पीटा जा रहा है, तो कहीं कर्मचारियों से बदतमीजी की जा रही है। सरकार धरातल पर कुछ भी करने में असमर्थ है और सिर्फ दूसरों पर दोषारोपण कर रही है।
अपनी ही सरकार के खिलाफ अपनों में ही आक्रोश
सुशासन तिहार के मंचों पर भाजपा के ही मंत्रियों और विधायकों के बीच चल रही खींचतान पर भी विपक्ष ने चुटकी ली। जब पत्रकारों ने ब्रजमोहन अग्रवाल, रोहित साहू, रामकुमार टोप्पो और शकुंतला पोर्ते जैसे नेताओं के तीखे तेवरों को लेकर सवाल पूछा, तो वक्ता ने कहा कि यह सुशासन तिहार दरअसल सरकार की फेल योजनाओं को अमलीजामा पहनाने का एक असफल प्रयास है। क्षेत्र में काम न होने के कारण अपनी ही पार्टी के सांसदों और विधायकों की खींचतान अब मंचों पर खुलकर सामने आ रही है। चूंकि मंत्री उनकी सुन नहीं रहे हैं और विकास कार्य ठप पड़े हैं, इसलिए विधायकों का यह सारा गुस्सा सुशासन तिहार के मंचों पर मंत्रियों के खिलाफ ही फूट रहा है।