
कटघोरा/पोड़ी उपरोड़ा/ सेन्ट्रल छत्तीसगढ़: वर्तमान सरकार और जिला प्रशासन की नाक के नीचे चल रही कथित “भर्राशाही” और प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ अब युवा कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष (ग्रामीण) ने पोड़ी उपरोड़ा जनपद पंचायत में चल रहे भ्रष्टाचार और तानाशाही पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर सरकार और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा है कि आखिर ट्रांसफर लिस्ट जारी होने के बावजूद “कमीशनखोर” अधिकारी अपने पद पर क्यों और किसकी मेहरबानी से जमे हुए हैं?
ट्रांसफर के बाद भी पद छोड़ने को तैयार नहीं CEO
मिली जानकारी के अनुसार, पोड़ी उपरोड़ा जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) का स्थानांतरण आदेश जारी हो चुका है। इसके बावजूद वे अब तक अपने पद पर बने हुए हैं। युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने तीखा प्रहार करते हुए पूछा— “यह मेहरबानी किसकी है? सरकार की या जिला प्रशासन की?”
आरोप है कि आदेश आने के बाद भी अधिकारी का अपनी कुर्सी से चिपके रहना जिला प्रशासन की ढीली कार्यप्रणाली और बड़े राजनीतिक संरक्षण की ओर इशारा करता है।
जनप्रतिनिधियों और सरपंचों में भारी आक्रोश
क्षेत्र की इस अव्यवस्था से केवल संगठन ही नहीं, बल्कि जमीन पर काम करने वाले जनप्रतिनिधि भी त्रस्त हैं। निर्वाचित जनपद सदस्यों और कई ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने सीईओ की कार्यशैली पर गंभीर नाराजगी जताई है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जनपद क्षेत्र में लगातार कमीशनखोरी का खेल चल रहा है और जिला प्रशासन स्थानीय जनप्रतिनिधियों की आवाज को लगातार अनदेखा कर रहा है।
15वें वित्त की राशि पर ‘बंदरबांट’ और ब्याज का खेल
युवा कांग्रेस ने एक और बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि जनपद के खातों में 15वें वित्त आयोग की राशि मौजूद होने के बाद भी उसे नियमतः सरपंचों के खातों में ट्रांसफर नहीं किया जा रहा है।
“पैसा सरकारी खातों में डंप रखकर उसके ब्याज की राशि का बंदरबांट किया जा रहा है। विकास कार्य समय सीमा पर पूरे नहीं हो रहे हैं। जब इसका सीधा जिम्मेदार संबंधित अधिकारी है, तो उसे तत्काल कार्यमुक्त क्यों नहीं किया जा रहा?” — युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष
सरकार और प्रशासन से सीधे सवाल
युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष (ग्रामीण) ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि पोड़ी उपरोड़ा की जनता और जनप्रतिनिधि अब इस भर्राशाही और अंधेरी व्यवस्था को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने मांग की है कि ट्रांसफर आदेश का तत्काल पालन कराते हुए दागी अधिकारी को पद से हटाया जाए और जनपद के रुके हुए विकास कार्यों व राशि को तुरंत बहाल किया जाए।
अब देखना यह होगा कि इस तीखे विरोध के बाद जिला प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागता है या ‘कमीशनखोरी’ के इस खेल को यूं ही शह मिलती रहेगी।