
कोरबा / पाली / सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ : छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक कसावट और ट्रांसफर ऑर्डर्स को अमलीजामा पहनाने के दावों को कोरबा जिले के पाली जनपद पंचायत में सरेआम ठेंगा दिखाया जा रहा है। शासन के कड़े निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए प्रभारी जनपद सीईओ मोनेश देवांगन (मूल पद: एपीओ) तबादले के 5 महीने बीत जाने के बाद भी अपनी कुर्सी पर कुंडली मारकर बैठे हुए हैं।
हैरान करने वाली बात यह है कि शक्ति जिले में ट्रांसफर होने और वहां जॉइनिंग की समय-सीमा कब की खत्म होने के बाद भी साहब को रिलीव नहीं किया जा रहा है। अब अंदरखाने से खबर आ रही है कि साहब पाली के साथ-साथ जिले के एक और जनपद पंचायत में अपना कब्जा जमाने की रणनीति तैयार कर रहे हैं।

प्रशासनिक मौन पर उठ रहे गंभीर सवाल, आखिर ‘मेहरबानी’ क्यों?
सूत्रों की मानें तो मोनेश देवांगन का ट्रांसफर आदेश जारी हुए पूरे 5 महीने का लंबा वक्त गुजर चुका है। नियमतः किसी भी अधिकारी को ट्रांसफर के तत्काल बाद कार्यमुक्त (Relieve) हो जाना चाहिए, लेकिन पाली जनपद में नियम-कायदों का सरेआम जनाजा निकाला जा रहा है। जिला पंचायत सीईओ की इस पूरे मामले पर ‘मौन’ स्वीकृति ने प्रशासनिक हलकों में कई गंभीर संदेहों को जन्म दे दिया है।
बड़ा आरोप: क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि पाली जनपद पंचायत को ‘मलाई और मिठाई’ कलेक्शन का मुख्य केंद्र बना दिया गया है। भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगने के बाद भी आखिर जिला प्रशासन के आला अफसर इस अधिकारी पर इतने मेहरबान क्यों हैं, यह समझ से परे है।
अब दूसरे जनपद को भी निशाने पर लेने की तैयारी!
मिली जानकारी के अनुसार, मोनेश देवांगन न सिर्फ पाली की मलाईदार कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं, बल्कि वे जिले के एक और जनपद पंचायत में प्रभारी के तौर पर अपना कब्जा जमाने की बिसात बिछा रहे हैं। इसके लिए बकायदा विभागीय और राजनीतिक सांठ-गांठ की रणनीति बनाई जा रही है ताकि ‘कलेक्शन’ का दायरा और बढ़ाया जा सके।
एक तरफ शासन जीरो टॉलरेंस और पारदर्शिता की बात करता है, वहीं दूसरी तरफ मूल पद एपीओ (APO) होने के बावजूद एक अधिकारी ट्रांसफर के 5 महीने बाद भी वीआईपी कुर्सी का सुख भोग रहा है।