बस्तर की बदली तस्वीर ! पूर्व महिला नक्सलियों ने रैंप पर बिखेरा जलवा, हथकरघा परिधानों में दिखा नया आत्मविश्वास

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रायपुर। बस्तर के जंगलों से निकलकर मुख्यधारा में लौटने वाली पूर्व महिला नक्सलियों ने अब बदलाव की एक नई तस्वीर पेश की है। रायपुर में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में इन महिलाओं ने पारंपरिक और हथकरघा से तैयार परिधानों में रैंप वॉक किया। कभी जिन हाथों में हथियार हुआ करते थे, उन्हीं हाथों से अब हुनर और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी जा रही है।

रैंप पर उतरीं तो गूंज उठीं तालियां

कार्यक्रम में पूर्व महिला नक्सलियों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ रैंप पर कदम रखा। पारंपरिक परिधानों में उनका अंदाज देखते ही दर्शकों ने तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया। रैंप वॉक का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं।

हिंसा के रास्ते से हुनर की दुनिया तक

इन महिलाओं की जिंदगी में आया बदलाव बेहद खास है। नक्सली संगठन से अलग होकर मुख्यधारा में लौटने के बाद अब वे सम्मान के साथ सामान्य जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। हथकरघा दिवस के मंच पर उनकी मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि सही अवसर मिलने पर जिंदगी को नई दिशा दी जा सकती है।

रैंप वॉक में पारंपरिक परिधानों को प्रमुखता दी गई। इससे छत्तीसगढ़ की संस्कृति, स्थानीय हुनर और हथकरघा उत्पादों को भी मंच मिला। कार्यक्रम में इन महिलाओं की भागीदारी सामाजिक बदलाव और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखी गई।

बस्तर में बदलाव का संदेश

बस्तर लंबे समय तक माओवादी हिंसा से प्रभावित रहा है। ऐसे में पूर्व नक्सलियों का हथियार छोड़कर सामान्य जीवन में लौटना बदलाव की बड़ी तस्वीर पेश करता है। रायपुर में हुआ यह कार्यक्रम सिर्फ हथकरघा उत्पादों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूर्व महिला नक्सलियों की कहानी ने इसे सामाजिक बदलाव का मंच बना दिया।

वीडियो : पूर्व महिला नक्सलियों के रैंप वॉक का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है।

▶ यहां देखें रैंप वॉक का VIDEO

एक नजर में

  • कार्यक्रम : राष्ट्रीय हथकरघा दिवस
  • स्थान : रायपुर, छत्तीसगढ़
  • प्रतिभागी : पूर्व महिला नक्सली
  • खास बात : पारंपरिक हथकरघा परिधानों में रैंप वॉक
  • संदेश : हिंसा से मुख्यधारा और आत्मनिर्भरता की ओर बदलाव