रायपुर। कभी नक्सल हिंसा के साये में जिंदगी गुजारने वाली महिलाओं की एक नई तस्वीर रायपुर में देखने को मिली। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में आत्मसमर्पित महिला नक्सलियों ने कोसा सिल्क और पारंपरिक हैंडलूम परिधानों में रैंप वॉक किया। मंच पर पूरे आत्मविश्वास के साथ कदम बढ़ाती महिलाओं को देखकर सभागार तालियों से गूंज उठा।
इन महिलाओं के लिए यह सिर्फ रैंप वॉक नहीं था, बल्कि सामान्य जिंदगी की ओर बढ़ते उनके सफर का एक नया अनुभव भी था। महिलाओं ने बताया कि वे पहली बार रायपुर आई हैं और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें इतने बड़े मंच पर आने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल होने और रैंप पर चलने के अनुभव को खुशी और सम्मान से जोड़ा।
महिलाओं की बात ने सामने रखी अलग तस्वीर
कार्यक्रम के बाद इसे लेकर अलग-अलग तरह की बातें सामने आईं। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि महिलाओं को सिलाई प्रशिक्षण के लिए रायपुर बुलाया गया था और कथित तौर पर उनकी जानकारी के बिना उन्हें रैंप पर उतार दिया गया।
हालांकि, कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं ने अपने बयानों में इससे अलग अनुभव साझा किया। उन्होंने बड़े मंच पर आने को अपने लिए खास अवसर बताया और इस अनुभव पर खुशी जाहिर की। महिलाओं के इन बयानों के बाद कार्यक्रम को लेकर सामने आए दावों पर नई चर्चा शुरू हो गई।
ऐसे में पूरे मामले को समझने के लिए कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं की अपनी बात भी अहम हो जाती है। मंच पर उनकी भागीदारी और रैंप वॉक के दौरान दिखा उत्साह एक अलग तस्वीर पेश करता है।
कोसा सिल्क में रैंप पर उतरीं आत्मसमर्पित महिलाएं
प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में महिलाओं ने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कोसा सिल्क और हैंडलूम परिधानों को पहनकर रैंप वॉक किया। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं की प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान खींचा। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच महिलाओं ने पूरे आत्मविश्वास के साथ रैंप पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
इस दृश्य में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक बुनकरी और आत्मसमर्पण के बाद मुख्यधारा में लौट रही महिलाओं की नई जिंदगी, दोनों एक साथ दिखाई दिए। हिंसा के रास्ते से बाहर निकलकर हुनर और आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदमों की यह तस्वीर कार्यक्रम का खास आकर्षण रही।
#WATCH | Raipur, Chhattisgarh: Former women Naxals, who once carried weapons in the dense forests of Bastar, walked the ramp to huge applause at a National Handloom Day event in Raipur after joining the mainstream. (07.08) pic.twitter.com/51mc8lEXWE
— ANI (@ANI) August 13, 2026
मुख्यमंत्री ने बढ़ाया उत्साह
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम के दौरान आत्मसमर्पित महिलाओं से आत्मीय संवाद किया और उनका उत्साह बढ़ाया। महिलाओं ने भी मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया।
सरकार की पुनर्वास नीति के तहत मुख्यधारा में लौटे लोगों को सम्मान, रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे आयोजनों में महिलाओं की भागीदारी उन्हें समाज के सामने अपनी पहचान और प्रतिभा दिखाने का अवसर देती है।
‘लोकल टू ग्लोबल’ की ओर बढ़ रहा छत्तीसगढ़ का कोसा
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के कोसा और पारंपरिक हथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड ‘कोशल फैब’ का शुभारंभ किया।
कोसा सिल्क की पहचान को व्यापक बाजार से जोड़ने की कोशिशों के बीच आत्मसमर्पित महिलाओं की रैंप वॉक ने आयोजन को एक अलग संदेश दिया। एक ओर प्रदेश की पारंपरिक कला और बुनकरी की पहचान सामने आई, तो दूसरी ओर महिलाओं के आत्मविश्वास ने पुनर्वास के बाद खुल रहे नए अवसरों की झलक दिखाई।
बदलते बस्तर की तस्वीर
रायपुर के इस मंच पर आत्मसमर्पित महिलाओं की मौजूदगी बस्तर के बदलते सामाजिक परिवेश की एक तस्वीर के रूप में सामने आई। रैंप पर कोसा सिल्क में कदम बढ़ाती महिलाओं के चेहरे पर दिखा आत्मविश्वास इस बात की ओर इशारा करता है कि मुख्यधारा में वापसी के बाद उनके सामने जिंदगी को नए सिरे से शुरू करने के अवसर मौजूद हैं।
कार्यक्रम को लेकर अलग-अलग दावे भले सामने आए हों, लेकिन मंच पर मौजूद महिलाओं की अपनी बात और उनकी सक्रिय भागीदारी ने पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामने रखा।