कटघोरा ( सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ ): ।देश की आजादी के इतिहास में कटघोरा के ऐतिहासिक जय स्तंभ चौक का स्थान बेहद खास और गौरवमयी है। 15 अगस्त 1947 को जब पूरा देश गुलामी की जंजीरों को तोड़कर आजादी की पहली सुबह का स्वागत कर रहा था, तब कटघोरा के इसी ऐतिहासिक चौक पर पूरे सम्मान और गरिमा के साथ पहली बार राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया गया था। इस ऐतिहासिक पल का विस्तृत विवरण तत्कालीन गजेटियर और प्रशासनिक अभिलेखों में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है।
जनसैलाब और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की रही थी मौजूदगी
तत्कालीन बिलासपुर जिले के अधीन आने वाली कटघोरा तहसील में 15 अगस्त 1947 की सुबह एक नया सवेरा लेकर आई थी। गजेटियर में दर्ज विवरणों के अनुसार:
ऐतिहासिक ध्वजारोहण: तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों, स्थानीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, समाजसेवियों और भारी संख्या में जुटे नागरिकों की उपस्थिति में तिरंगा फहराया गया और राष्ट्रध्वज को सलामी दी गई।
शासकीय संदेश का वाचन: उस समय ‘मध्य प्रांत एवं बरार’ (Central Provinces and Berar) शासन द्वारा जारी आजादी का आधिकारिक संदेश और घोषणा पत्र आम जनता के समक्ष पढ़कर सुनाया गया।
प्रभातफेरी और उत्सव: ध्वजारोहण के पश्चात नगर में देशभक्ति नारों के साथ भव्य प्रभातफेरी निकाली गई तथा जनसमूह में मिष्ठान वितरण कर स्वतंत्रता का उत्सव मनाया गया।
इस ऐतिहासिक क्षण में कटघोरा व आसपास के क्षेत्र के वरिष्ठ स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, प्रमुख मालगुजारों और स्थानीय गणमान्य नागरिकों ने संयुक्त रूप से ध्वज को सलामी दी थी।
आजादी के प्रतीक के रूप में स्थापित हुआ ‘जय स्तंभ’
1947 के इस अविस्मरणीय दिन और देश की आजादी में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सपूतों की स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए इस चौक पर ‘जय स्तंभ’ की स्थापना की गई। तभी से यह स्थल ‘जय स्तंभ चौक’ के नाम से पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध हुआ।
राष्ट्रीय पर्वों का केंद्र:
आज भी स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर नगरवासी और प्रशासनिक अधिकारी जय स्तंभ चौक पहुंचकर राष्ट्रध्वज को नमन करते हैं और शहीदों के बलिदान को याद करते हैं।