
कोरबा ( सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ ): बिलासपुर-अंबिकापुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-130) के निर्माण में पिछले दो सालों से लगा ग्रहण आखिरकार खत्म हो गया है। सुतर्रा से जुराली गांव के बीच मुआवजे के विवाद के कारण रुके पड़े 2 किलोमीटर लंबे सड़क निर्माण को हरी झंडी दिखाने के लिए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। कटघोरा के जुराली गांव में सड़क के दायरे में आ रहे तीन मकानों को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर ढहा दिया गया।
मुआवजा वितरण के बाद भी अटका था काम
यह पूरा मामला लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन था। हाईवे निर्माण की लेटलतीफी को देखते हुए प्रशासन ने हाल ही में पहल कर प्रभावित भू-स्वामियों को मुआवजे की राशि का भुगतान कर दिया था। अधिकारियों के मुताबिक, लगभग एक सप्ताह पहले मुआवजा राशि मिलने के बावजूद जमीन मालिक मकान खाली करने को तैयार नहीं थे। चूंकि प्रोजेक्ट पहले ही दो साल पिछड़ चुका था, इसलिए निर्माण कंपनी की शिकायत और सार्वजनिक हित को देखते हुए प्रशासन को यह सख्त कदम उठाना पड़ा।
कम मुआवजे और जल्दबाजी का आरोप
इस कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जमीन मालिकों का सीधा आरोप है कि उन्हें जो मुआवजा दिया गया है, वह जमीन की वास्तविक कीमत से बहुत कम है। इसी असंतोष के कारण वे घर नहीं छोड़ रहे थे। पीड़ितों ने यह भी कहा कि प्रशासन ने उन्हें संभलने का मौका तक नहीं दिया और बिना कोई अतिरिक्त समय दिए अचानक उनके आशियाने को मलबे में तब्दील कर दिया।
अब रफ्तार पकड़ेगा हाईवे का काम
बुलडोजर एक्शन के बाद अब सड़क निर्माण कंपनी ने राहत की सांस ली है और रुके हुए 2 किलोमीटर के हिस्से पर काम दोबारा शुरू कर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि मुआवजा मिलने के बाद वैधानिक रूप से जमीन शासन की हो जाती है, इसलिए विकास कार्यों में किसी भी तरह का विलंब अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस हिस्से के बनते ही बिलासपुर से अंबिकापुर का सफर बेहद सुगम हो जाएगा।