
कटघोरा ( सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ ) : छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ के आह्वान पर आज बिलासपुर संभाग के विभिन्न वन परिक्षेत्रों में भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। स्थानांतरण नीति के उल्लंघन और प्रशासनिक संवादहीनता से नाराज वन रक्षकों और क्षेत्रपालों ने ‘काली पट्टी’ लगाकर अपनी ड्यूटी की और शासन के प्रति अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।

प्रमुख क्षेत्रों में ठप रहा प्रशासनिक सौहार्द
आज सुबह से ही कटघोरा वन मंडल के अंतर्गत आने वाले पसान, जटगा, कटघोरा, ऐतमा और मोरगा परिक्षेत्रों में कर्मचारी काली पट्टी बांधकर कार्यालयों और बीट क्षेत्रों में नजर आए। कर्मचारियों का कहना है कि यह केवल एक शुरुआत है; यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो यह शांतिपूर्ण विरोध जल्द ही उग्र आंदोलन में बदल जाएगा।
विरोध के तीन मुख्य कारण:
- नियम विरुद्ध तबादले: कर्मचारियों का आरोप है कि स्थानांतरण पर प्रतिबंध होने के बावजूद और सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की असहमति के बाद भी धड़ल्ले से ट्रांसफर किए जा रहे हैं।
- मनमाना कार्य आवंटन: संघ के अनुसार, स्थानीय स्तर पर अधिकारियों द्वारा बिना किसी ठोस आधार के कर्मचारियों को मूल पदस्थापना से हटाकर अन्यत्र संलग्न (Attach) किया जा रहा है।
- अनसुनी मांगें: संघ के संभागीय अध्यक्ष प्रीतम कुमार पुराईन ने बताया कि कई बार मौखिक और लिखित चर्चा के बावजूद प्रशासन ने उनकी समस्याओं पर कोई सार्थक पहल नहीं की है।
7 दिनों का अल्टीमेटम: ‘करो या मरो’ की स्थिति
वन कर्मचारी संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि आज का यह ‘काली पट्टी’ प्रदर्शन केवल एक सांकेतिक विरोध है। यदि 7 दिनों के भीतर सभी विवादित स्थानांतरण आदेश निरस्त नहीं किए जाते और कार्य आवंटन में पारदर्शिता नहीं लाई जाती, तो बिलासपुर संभाग के समस्त कर्मचारी काम बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
“हमने हमेशा बातचीत का रास्ता चुना, लेकिन जब प्रशासन नियमों को ताक पर रखकर कर्मचारियों का मानसिक उत्पीड़न करने लगे, तो हमारे पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।”
— प्रीतम कुमार पुराईन, संभागीय अध्यक्ष