
कटघोरा ( सेन्ट्रल छत्तीसगढ़): कटघोरा वनमंडल में जंगली हाथियों की मौजूदगी और बढ़ती संख्या को देखते हुए वन विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। एक हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में वन विभाग के अधिकारी ने क्षेत्र में हाथियों की स्थिति और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के प्रयासों पर विस्तृत जानकारी साझा की।
हाथियों की वर्तमान स्थिति
अधिकारी के अनुसार, वर्तमान में कटघोरा वनमंडल में कुल 46 हाथी विचरण कर रहे हैं। इनका विवरण इस प्रकार है:
- ऐतमा रेंज: यहाँ सबसे बड़ा दल मौजूद है, जिसमें 44 हाथी शामिल हैं।
- केन्दई और एतमानगर रेंज: इन दोनों क्षेत्रों में 1-1 लोन हाथी (अकेला हाथी) देखा गया है।
हाथियों के व्यवहार और सुरक्षा पर जोर
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव आमतौर पर बिना कारण हमला नहीं करते। हाथियों के हमलों के मुख्य कारण निम्नलिखित हो सकते हैं:
- उकसावा: यदि हाथियों को तंग किया जाए या उनके मार्ग में बाधा डाली जाए, तो वे बचाव में आक्रामक हो सकते हैं।
- भोजन की तलाश: जंगलों में प्राकृतिक आवास की कमी और फसलों/सब्जियों के रूप में आसानी से उपलब्ध भोजन के कारण हाथी रिहायशी इलाकों की ओर रुख करते हैं।
जन-जागरूकता और मुआवजा
अधिकारी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में जन-जागरूकता अभियानों और हाथियों के आवास विकास कार्यों के सकारात्मक परिणाम मिले हैं। हाथियों की संख्या में वृद्धि हुई है, जबकि दुर्घटनाओं में कमी आई है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि:
- वन विभाग द्वारा दी जाने वाली पल-पल की सूचनाओं का पालन करें।
- हाथियों को देखने पर उन्हें परेशान न करें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
- किसी भी प्रकार की फसल या संपत्ति की हानि होने पर तुरंत वन विभाग को सूचित करें ताकि उचित मुआवजे का भुगतान किया जा सके।
वन विभाग का कहना है कि शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से मानव और हाथियों के बीच सामंजस्य बिठाने का प्रयास किया जा रहा है। लोगों की सकारात्मक सोच और विभाग के साथ सहयोग से ही इस क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण और जन सुरक्षा दोनों को सुनिश्चित किया जा सकता है।
