
कोरबा ( सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ ) : कोयलांचल के कुसमुंडा क्षेत्र में सदस्यता सत्यापन (Membership Verification) से ठीक पहले श्रमिक संगठनों की सियासत गरमा गई है। पिछले कई महीनों से चल रही दलबदल की राजनीति के बीच इंटक (INTUC) यूनियन को एक बड़ा झटका लगा है। बीते 6 मई को पूर्व वेलफेयर बोर्ड मेंबर सोनू पटेल के नेतृत्व में इंटक के 370 वरिष्ठ पदाधिकारियों और सदस्यों ने भारतीय मजदूर संघ (BMS) का दामन थाम लिया।
भीतरघात और उपेक्षा बनी फूट का कारण
क्षेत्र में चर्चा है कि इंटक में अन्य संगठनों (एटक और एचएमएस) से आए नए सदस्यों को तरजीह देने के कारण पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष था।
- पुराने बनाम नए: आरोप है कि नए प्रवेश करने वाले नेताओं को खुश करने के चक्कर में संगठन के पुराने स्तंभों को कमेटी से बाहर कर दिया गया।
- पद का लालच: वरिष्ठ नेताओं को चौथे नंबर का समीकरण बदलने का आश्वासन देकर कंपनी बोर्ड में जगह मांगी जा रही है, जिससे निष्ठावान कार्यकर्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
नेताओं की छवि पर उठते सवाल
बार-बार पाला बदलने वाले नेताओं के ‘पदलोभी’ स्वभाव ने आम कामगारों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। मजदूरों का मानना है कि बार-बार संगठन बदलने से नेताओं की विश्वसनीयता खत्म हो रही है, जिसका सीधा असर श्रमिक हितों की लड़ाई पर पड़ सकता है।
बीएमएस का दबदबा और आंदोलन का शंखनाद
कुसमुंडा क्षेत्र में पिछले 20 वर्षों से नंबर 1 के पायदान पर काबिज बीएमएस ने इस बड़ी जॉइनिंग के साथ अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है।
”बीएमएस के अखिल भारतीय महामंत्री ने हाल ही में कुसमुंडा के कामगारों की समस्याओं को लेकर प्रबंधन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। आगामी 15 मई 2026 से चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा ने नए और पुराने सदस्यों में नया जोश भर दिया है।”