जिले के विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम: ग्राम वासियों एवं क्षेत्रवासियों की 35 से 40 वर्षों की लंबी तपस्या का हुआ अंत

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ग्राम कुम्हीपानी और गोपालपुर नरसिंह गंगा मार्ग पर उच्च स्तरीय पुलिया निर्माण को मिली करोड़ों की प्रशासनिक स्वीकृति

सेंट्रल छत्तीसगढ़(विनोद उपाध्याय)कोरबा/पाली:- जिला पंचायत कोरबा की एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में, जिला पंचायत सदस्य कौशल नेटी (क्षेत्र क्रमांक 09) के निरंतर और अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप, छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री द्वारा जिले के दो प्रमुख मार्गों पर बहुप्रतीक्षित उच्च स्तरीय पुलिया निर्माण कार्यों के लिए प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। यह निर्णय न केवल विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह ग्राम वासियों के दशकों पुराने संघर्ष और निरंतर मांग की भी एक बड़ी जीत है।
स्वीकृत कार्यों और उनकी लागत का विवरण:
शासकीय आदेश के अनुसार, निम्नलिखित दो प्रमुख परियोजनाओं के लिए करोड़ों रुपए की राशि स्वीकृत की गई है:
ग्राम कुम्हीपानी (खारून नदी) पर उच्च स्तरीय पुलिया निर्माण: इस बहुप्रतीक्षित परियोजना के लिए कुल 490 लाख (4.90 करोड़) रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। यह पुलिया ग्राम पंचायत बतरा के आश्रित ग्राम कुम्हीपानी के पहुंच मार्ग पर खारून नदी पर बनाई जाएगी।
गोपालपुर से नवापारा के बीच नरसिंह गंगा नाला पर उच्च स्तरीय पुलिया निर्माण: इस महत्वपूर्ण मार्ग के लिए कुल 5 करोड़ 25 लाख रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। यह पुलिया गोपालपुर से नवापारा के बीच नरसिंह गंगा नाले पर निर्मित होगी, जो कई गांवों को आपस में जोड़ेगी।
35 से 40 वर्षों का लंबा संघर्ष और चिरलंबित मांग:
इन स्वीकृतियों का महत्व इस बात से भी बढ़ जाता है कि यह केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि यह इन क्षेत्रों के ग्राम वासियों के 35 से 40 वर्षों के लंबे संघर्ष और निरंतर मांग की जीत है। पिछले तीन दशकों से अधिक समय से, इन दोनों क्षेत्रों के निवासी हर साल मानसून के दौरान भारी कठिनाइयों का सामना कर रहे थे। एक पुलिया के अभाव में, ये पूरे क्षेत्र मुख्य विकासखंड से कट जाते थे, जिससे उनका जीवन ठप हो जाता था।
मांग के पीछे की गंभीर समस्याएं और स्वीकृति का महत्व:
ग्राम वासियों द्वारा की गई यह लंबी मांग निम्नलिखित गंभीर समस्याओं पर आधारित थी, जिनका सामना वे पीढ़ियों से कर रहे थे, और अब इन पुलियों के निर्माण से उन्हें स्थायी राहत मिलेगी:
आवागमन में पूर्ण बाधा (खासकर बारिश में): ग्राम कुम्हीपानी और गोपालपुर-नवापारा मार्ग दोनों पर मानसून के दौरान नदी और नाले में जलस्तर बढ़ने से, यह पूरा क्षेत्र मुख्य विकासखंड (पाली) से कट जाता था। आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं, दैनिक आवश्यकताओं और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए कोई संपर्क मार्ग नहीं बचता था।
शिक्षा पर गंभीर प्रभाव: इन क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए ‘हाईस्कूल बतरा’ और ‘शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल पोंडी’ जैसे स्कूलों में जाने के लिए जान जोखिम में डालकर नदी-नाले पार करने पड़ते थे।
आर्थिक क्षति और कृषि पर असर: इन क्षेत्रों के सैकड़ों किसान, जो लगभग 100 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर कृषि करते हैं, बाढ़ की स्थिति में अपनी उपज और कृषि सामग्री का परिवहन करने में असमर्थ हो जाते थे। इससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था।
हजारों की आबादी पर प्रभाव: इन दोनों मार्गों पर निर्भर गांवों की हजारों की आबादी अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए पूरी तरह से इन पुलियों पर निर्भर है। पुल निर्माण के उपरांत, अब क्षेत्र के शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास के नए द्वार खुलेंगे और लोगों को एक सुगम, सुरक्षित और सीधा मार्ग उपलब्ध हो सकेगा।
कौशल नेटी का प्रयास और स्वीकृति:
इस गंभीर और चिरलंबित समस्या को ध्यान में रखते हुए, जिला पंचायत सदस्य कौशल नेटी ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक विस्तृत और मार्मिक आवेदन पत्र लिखा था। उन्होंने न केवल समस्या का विस्तृत विवरण दिया, बल्कि यह भी बताया कि कैसे यह निर्माण कार्य क्षेत्रवासियों को वर्षों से चली आ रही इस गंभीर समस्या से स्थायी राहत प्रदान करेगा। उनके इस संवेदनशील और तथ्यात्मक प्रस्तुतीकरण को स्वीकार करते हुए, शासन द्वारा आवश्यक स्वीकृति प्रदान की गई है।
क्षेत्रवासियों ने इस बहुप्रतीक्षित और ऐतिहासिक स्वीकृति के लिए छत्तीसगढ़ शासन और विशेष रूप से कौशल नेटी का हृदय से धन्यवाद व्यक्त किया है, जिन्होंने उनकी 35 वर्षों की मांग को वास्तविक आकार दिया।