कटघोरा में बेखौफ रेत माफिया: अहिरन नदी का सीना चीरकर निकाला जा रहा ‘पीला सोना’, माइनिंग अफसर की भूमिका संदिग्ध

कोरबा ( सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ ) आशुतोष शर्मा : क्षेत्र में इन दिनों रेत माफियाओं का आतंक चरम पर है। कटघोरा की जीवनदायिनी अहिरन नदी से लेकर बरतरई गांव तक अवैध उत्खनन का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि इस पूरे खेल में माइनिंग विभाग की चुप्पी और संदिग्ध कार्यप्रणाली ने प्रशासन की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सेटिंग का खेल: पहले कार्रवाई, फिर ‘मोटा माल’ लेकर ढील

​सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कटघोरा क्षेत्र में माइनिंग ऑफिसर और रेत माफियाओं के बीच ‘मधुर संबंध’ स्थापित हो चुके हैं। चर्चा है कि विभाग द्वारा दिखावे के लिए पहले गाड़ियां पकड़ी जाती हैं, लेकिन बाद में कथित ‘सेटिंग’ के माध्यम से उन्हें छोड़ दिया जाता है। इस मोटी रकम के लेनदेन ने माफियाओं के हौसले इतने बुलंद कर दिए हैं कि वे अब बेखौफ होकर अवैध भंडारण कर रहे हैं।

कहाँ हो रही है सप्लाई?

​अहिरन नदी और बरतरई से अवैध रूप से निकाली गई रेत का जाल दूर-दूर तक फैला हुआ है:

  • रेल कंपनियां: कटघोरा से दीपका के बीच निर्माणाधीन रेल परियोजनाओं में भारी मात्रा में अवैध रेत खपाई जा रही है।
  • NHI सड़क निर्माण: राष्ट्रीय राजमार्ग (NHI) के कार्यों में भी ट्रैक्टरों और टीपरों के माध्यम से दिन-रात सप्लाई जारी है।
  • अवैध डंपिंग: क्षेत्र में कई स्थानों पर रेत के बड़े-बड़े पहाड़ खड़े कर दिए गए हैं, जिन्हें ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है।

प्रशासनिक संरक्षण में फल-फूल रहा कारोबार

​स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि कटघोरा माइनिंग अफसर के इशारे पर ही यह पूरा अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। जहां एक ओर सरकार को राजस्व की भारी चपत लग रही है, वहीं दूसरी ओर रेत माफिया मालामाल हो रहे हैं। नदी के पर्यावरण को हो रहा नुकसान आने वाले समय में क्षेत्र के लिए बड़ा संकट बन सकता है।

“क्या जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं या जानबूझकर आंखों पर पट्टी बांधी गई है? आखिर कब तक सरकारी संपत्ति की इस लूट पर लगाम लगेगी?”क्षेत्रीय नागरिक

  • अहिरन नदी से अवैध उत्खनन जारी।
  • बरतरई गांव बना अवैध रेत भंडारण का केंद्र।
  • ​माइनिंग विभाग पर ‘लेनदेन’ के गंभीर आरोप।
  • ​रेलवे और सड़क निर्माण कंपनियों को अवैध सप्लाई।