भारी बारिश भी नहीं डिगा पाई दादा हीरा सिंह मरकाम के अनुयायियों का जज्बा, छठवीं पुण्यतिथि पर पैतृक गांव तिवरता में उमड़ा जनसैलाब; हजारों लोगों ने दी श्रद्धांजलि, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ स्वास्थ्य एवं रक्तदान शिविर का हुआ आयोजन

सेंट्रल छत्तीसगढ़ / कोरबा / तिवरता (पाली-तानाखार)। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के संस्थापक, गोंडवाना आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार और आदिवासी समाज के स्वाभिमान की आवाज रहे ‘गोंडवाना रत्न’ दादा हीरा सिंह मरकाम की छठवीं पुण्यतिथि पर उनके पैतृक गांव तिवरता में विशाल श्रद्धांजलि एवं स्मृति समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भारी बारिश के बावजूद हजारों की संख्या में लोग कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। बारिश भी लोगों के उत्साह और दादा मरकाम के प्रति श्रद्धा को कम नहीं कर सकी। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से आए लोगों और छत्तीसगढ़ के दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे समाजजनों की मौजूदगी ने आयोजन को व्यापक स्वरूप दिया।

कार्यक्रम में श्रद्धांजलि अर्पित करने, दादा मरकाम के विचारों को याद करने और सामाजिक एकता का संदेश देने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण कार्यक्रम देखने और उसमें शामिल होने के लिए लोगों ने अपने-अपने स्तर पर व्यवस्था बनाई। बारिश और खराब मौसम के बीच भी लोग डटे रहे तथा अपने प्रिय जननेता को श्रद्धासुमन अर्पित किए। पूरे आयोजन में सामाजिक एकजुटता, सांस्कृतिक पहचान और दादा मरकाम के विचारों के प्रति आस्था का माहौल दिखाई दिया।

दादा हीरा सिंह मरकाम के जीवन संघर्ष को किया गया याद

दादा हीरा सिंह मरकाम का जन्म 14 जनवरी 1942 को कोरबा जिले के तिवरता गांव में हुआ था। उनका जीवन एक शिक्षक, समाजसेवी, विचारक और जननेता के रूप में संघर्षों से भरा रहा। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं देने के साथ समाज की समस्याओं को करीब से समझा और आदिवासी समाज को जागरूक, संगठित तथा अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाने का संकल्प लिया।

शिक्षक के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने शिक्षा और सामाजिक अधिकारों से जुड़े विषयों पर आवाज उठाई। आगे चलकर उन्होंने सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया और पाली-तानाखार क्षेत्र से राजनीति में अपनी पहचान बनाई। वर्ष 1985 में वे अविभाजित मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य चुने गए। इसके बाद उन्होंने गोंडवाना समाज की भाषा, संस्कृति, परंपरा, सामाजिक अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी के सवालों को व्यापक मंच प्रदान करने की दिशा में काम किया।

दादा हीरा सिंह मरकाम ने 13 जनवरी 1991 को गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की स्थापना की। उनका उद्देश्य आदिवासी समाज को संगठित करना, उसकी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करना और समाज के वंचित वर्गों की आवाज को मजबूत बनाना था। वर्ष 1998 में वे पाली-तानाखार विधानसभा क्षेत्र से पुनः विधायक निर्वाचित हुए। उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा गोंडवाना आंदोलन, सामाजिक जागरूकता और आदिवासी समाज के संगठन को मजबूत करने में लगाया।

28 अक्टूबर 2020 को उनके निधन के बाद भी उनके विचार और सामाजिक आंदोलन से जुड़ी विरासत उनके अनुयायियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। तिवरता में आयोजित पुण्यतिथि समारोह इसी विरासत को याद करने और आने वाली पीढ़ियों तक उनके विचार पहुंचाने का अवसर बना।

बारिश के बीच भी उमड़ी भीड़, सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां

पुण्यतिथि समारोह में श्रद्धांजलि सभा के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। लोकसंस्कृति, पारंपरिक कला और समाज की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कार्यक्रमों ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। दूर-दराज से पहुंचे समाजजनों ने कार्यक्रमों में भागीदारी निभाई और दादा हीरा सिंह मरकाम के संघर्ष, विचारों तथा सामाजिक योगदान को याद किया।

कार्यक्रम को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। बारिश के कारण परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण रहीं, लेकिन लोगों ने अपनी सुविधानुसार व्यवस्था बनाकर आयोजन का हिस्सा बनना जारी रखा। इस दौरान समाज के लोगों ने एकजुट होकर अपनी सांस्कृतिक पहचान को सहेजने, आपसी भाईचारे को मजबूत करने और सामाजिक एकता के संकल्प को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।

आयोजन का उद्देश्य केवल पुण्यतिथि मनाना नहीं, बल्कि दादा मरकाम के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और समाज को संगठित रखने के प्रयासों को आगे बढ़ाना भी रहा।

स्वास्थ्य परीक्षण और रक्तदान शिविर से दिया जनसेवा का संदेश

श्रद्धांजलि समारोह के अवसर पर जनसेवा को प्राथमिकता देते हुए निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण एवं रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया। शिविर में लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराई गईं, वहीं युवाओं और अन्य समाजजनों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर जरूरतमंद मरीजों की सहायता के लिए योगदान दिया।

आयोजन के माध्यम से सामाजिक एकजुटता के साथ सेवा और सहयोग की भावना को भी प्रमुखता दी गई। दादा हीरा सिंह मरकाम के सामाजिक संघर्ष और समाज के हित में किए गए कार्यों को याद करते हुए लोगों ने उनके विचारों को व्यवहार में उतारने का संदेश दिया।

राष्ट्रीय अध्यक्ष तुलेश्वर मरकाम सहित पार्टी के विभिन्न संगठनों की रही सहभागिता

कार्यक्रम में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पाली-तानाखार विधायक तुलेश्वर मरकाम, प्रदेश उपाध्यक्ष कुलदीप मरकाम सहित पार्टी के विभिन्न पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समाज के प्रतिनिधि प्रमुख रूप से शामिल हुए। पार्टी के विभिन्न विंग, स्टूडेंट प्रकोष्ठ, युवा प्रकोष्ठ तथा अन्य संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भी आयोजन में सहभागिता निभाई।

पार्टी से जुड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में दादा हीरा सिंह मरकाम के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक योगदान को याद किया गया। विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे समाजजनों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके विचारों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

तिवरता से गूंजा सामाजिक एकता का संदेश

दादा हीरा सिंह मरकाम की छठवीं पुण्यतिथि पर तिवरता में उमड़ी भीड़ ने यह स्पष्ट किया कि उनके अनुयायियों के बीच उनकी स्मृतियां और विचार आज भी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। भारी बारिश के बावजूद हजारों लोगों की मौजूदगी, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहभागिता और स्वास्थ्य व रक्तदान शिविर जैसे जनसेवा के प्रयासों ने आयोजन को कई आयाम दिए।

दादा मरकाम का जीवन शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, राजनीतिक भागीदारी और आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा रहा। उनकी पुण्यतिथि पर एकत्र हुए लोगों ने उनके योगदान को याद करते हुए समाज में एकता, आपसी सहयोग और अधिकारों के प्रति जागरूकता बनाए रखने का संदेश दिया।

तिवरता में आयोजित यह श्रद्धांजलि समारोह दादा हीरा सिंह मरकाम के जीवन, संघर्ष और विचारों को याद करने के साथ गोंडवाना समाज की सांस्कृतिक विरासत तथा सामाजिक एकजुटता को आगे बढ़ाने का अवसर बना।