
कोरबा ( सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ ) : ग्राम पंचायत लखनपुर से सुतर्रा मुख्य बाईपास की बदहाली और उड़ती धूल से परेशान ग्रामीणों को प्रशासनिक बैठकों के बाद भी कोई राहत नहीं मिल सकी है। प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासनों पर अमल न होने से स्थानीय रहवासियों और दुकानदारों में भारी रोष व्याप्त है। हालात यह हैं कि धूल पर काबू पाने के लिए ग्रामीणों को स्वयं ही सड़कों पर पानी छिड़कना पड़ रहा है।
बैठक में बनी थी सहमति, टला था आंदोलन
उल्लेखनीय है कि सड़क की जर्जर हालत, मरम्मत और धूल नियंत्रण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने 7 अक्टूबर को चक्काजाम का ऐलान किया था। आंदोलन से ठीक एक दिन पहले, 6 अक्टूबर को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पोड़ी उपरोड़ा की अध्यक्षता में प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की समन्वय बैठक हुई थी। बैठक में पीडब्ल्यूडी एसडीओ प्रदीप कुमार मरकाम ने गड्ढों के समतलीकरण का कार्य शुरू कराने की जानकारी दी थी। वहीं, धूल नियंत्रण के लिए PWD एवं SECL को नियमित रूप से पानी छिड़काव कराने के निर्देश दिए गए थे। प्रशासन की इस पहल और आश्वासन पर भरोसा जताते हुए सरपंच प्रभा, उपसरपंच शिखी कुमार यादव सहित जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से प्रस्तावित चक्काजाम स्थगित कर दिया था।
हकीकत: एक दिन भी नहीं पहुंचा पानी का टैंकर
बैठक और प्रशासनिक वादों के बावजूद धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। भारी वाहनों की निरंतर आवाजाही के चलते सड़क पर दिनभर धूल के गुबार उड़ रहे हैं। सड़क किनारे बसे ग्रामीण धूल के आगोश में जीने को मजबूर हैं, वहीं स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि दुकानदारी पूरी तरह प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि एसडीएम के सुबह-शाम नियमित छिड़काव के निर्देश के बावजूद अब तक एक भी दिन पानी का छिड़काव नहीं कराया गया। थक-हारकर ग्रामीण खुद सड़क पर पानी डालने को विवश हैं।
उग्र आंदोलन की तैयारी
प्रशासनिक उपेक्षा से नाराज स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द नियमित पानी छिड़काव और सड़क सुधार का ठोस काम शुरू नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए बाध्य होंगे।