विष्णु भैया ने कराई रायपुर के इन 3 इलाकों में विकास की नई तस्वीर तैयार, कचना-लामांडी-सड्डू के लिए बनी बड़ी योजना

रायपुर। राजधानी के विस्तार के साथ कचना, लामांडी और सड्डू इलाके में बढ़ती आबादी और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सुनियोजित विकास की रूपरेखा तैयार की गई है। रायपुर विकास प्राधिकरण की नगर विकास योजना में सड़क नेटवर्क से लेकर हरियाली, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, पुलिस चौकी और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए भूमि का प्रावधान किया गया है।

इस योजना के जरिए वर्तमान में बिखरे भू-उपयोग को व्यवस्थित स्वरूप देने और क्षेत्र में भविष्य के विकास के लिए जरूरी अधोसंरचना तैयार करने का प्रस्ताव है। योजना में भूस्वामियों के हितों को ध्यान में रखते हुए अंतिम भूखंडों के आवंटन का भी प्रावधान किया गया है।

भूस्वामियों के लिए क्या रखा गया है?

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत मूल भूखंडों के आधार पर अंतिम भूखंड निर्धारित किए जाने हैं। मिश्रित भू-उपयोग के अंतर्गत मूल भूमि का 40 प्रतिशत हिस्सा अंतिम भूखंड के रूप में प्रस्तावित किया गया है। वहीं 100 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल वाले मूल भूखंडों के भूमिस्वामियों के लिए नेबरहुड शॉपिंग क्षेत्र में अंतिम भूखंड देने का प्रस्ताव है।

योजना में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी भूमिस्वामी को भूमिहीन करने का प्रावधान नहीं है। अलग-अलग हिस्सों में बंटी भूमि को बसरा नंबर के आधार पर एकीकृत कर संबंधित कुल रकबे के अनुसार अंतिम भूखंड देने की व्यवस्था प्रस्तावित है।

45 मीटर तक चौड़े मार्गों से जुड़ेगा क्षेत्र

भविष्य के यातायात दबाव को ध्यान में रखते हुए योजना में कई चौड़ाई के मार्ग प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें 45 मीटर, 30 मीटर, 24 मीटर और 18 मीटर चौड़े मार्ग शामिल हैं। इसके अलावा योजना स्तर पर 18 मीटर और 12 मीटर चौड़े मार्गों का भी प्रावधान किया गया है।

बड़े भूखंडों को प्रमुख और चौड़े मार्गों से जोड़ने का प्रस्ताव है, जबकि छोटे भूखंडों के लिए अपेक्षाकृत कम चौड़ाई वाले मार्ग निर्धारित किए गए हैं। इससे क्षेत्र में आवागमन और भविष्य के यातायात प्रबंधन को व्यवस्थित करने का लक्ष्य है।

शहर के बीच हरित क्षेत्र भी विकसित होंगे

नगर विकास योजना में पर्यावरणीय जरूरतों को भी शामिल किया गया है। योजना क्षेत्र की 7.29 प्रतिशत भूमि खुले क्षेत्र और नगरीय वन के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव है। इसके तहत करीब 6.7 एकड़ खुला क्षेत्र और लगभग 4.8 एकड़ में नगरीय वन विकसित किया जाना प्रस्तावित है।

इसका उद्देश्य विकसित हो रहे शहरी क्षेत्र में हरित स्थानों को सुरक्षित रखना और नागरिकों के लिए बेहतर पर्यावरणीय परिवेश तैयार करना है।

स्कूल से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक सुविधाओं का प्रावधान

योजना में सामाजिक अधोसंरचना के लिए कुल 7.94 एकड़ भूमि आरक्षित करने का प्रस्ताव है। इसमें विद्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी, पुलिस चौकी और विद्युत सब-स्टेशन जैसी सुविधाओं के लिए भूमि रखी गई है।

निम्न आयवर्ग के परिवारों के लिए भी भूमि आरक्षित करने का प्रस्ताव योजना में शामिल है। इससे क्षेत्र के विकास को केवल आवासीय विस्तार तक सीमित न रखते हुए आवश्यक सामाजिक सुविधाओं के साथ विकसित करने की योजना है।

सितंबर में मिली प्रारूप योजना को मंजूरी

कचना, लामांडी और सड्डू नगर विकास योजना के लिए रायपुर विकास प्राधिकरण के संचालक मंडल से 10 सितंबर 2025 को सैद्धांतिक सहमति मिली थी। इसके बाद 5 दिसंबर 2025 को योजना के आशय का प्रकाशन राजपत्र में किया गया। प्राप्त आवेदनों और आपत्तियों पर अंतर्विभागीय समिति ने 12 फरवरी 2026 को सुनवाई की।

इसके बाद प्रारूप नगर विकास योजना को 10 सितंबर 2026 को संचालक मंडल से स्वीकृति मिली और 11 सितंबर 2026 को इसका प्रकाशन किया गया।

10 अक्टूबर तक दे सकते हैं दावा-आपत्ति

योजना में प्रस्तावित अंतिम भूखंडों का आवंटन अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है। रायपुर विकास प्राधिकरण ने संबंधित पक्षों को दावा एवं आपत्ति प्रस्तुत करने का अवसर दिया है। छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम की धारा 50(3) के तहत 10 अक्टूबर 2026 तक दावे और आपत्तियां प्रस्तुत की जा सकती हैं।

दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रस्तावित योजना लागू होने के बाद कचना, लामांडी और सड्डू क्षेत्र में सड़क, हरियाली और नागरिक सुविधाओं के लिहाज से व्यवस्थित विकास का रास्ता तैयार होने की उम्मीद है।