सुकमा/रायपुर: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में बाढ़ से बिगड़े हालात के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचे। मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर जमीनी स्थिति देखी और राहत शिविरों में पहुंचकर लोगों से सीधे बातचीत की। इस दौरान उन्होंने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि सरकार संकट की इस घड़ी में उनके साथ खड़ी है।

मुख्यमंत्री ने शबरीनगर, श्रीनगर और लाइनपारा समेत कई प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने राहत एवं स्वास्थ्य शिविरों में उपलब्ध व्यवस्थाओं की जानकारी ली। प्रभावित लोगों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने बाढ़ से हुए नुकसान, भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं और दूसरी जरूरतों के बारे में जानकारी ली।
राहत शिविर में खुद परोसा भोजन
सुकमा दौरे के दौरान मुख्यमंत्री राहत शिविर में रह रहे लोगों के बीच पहुंचे और स्वयं भोजन परोसा। उन्होंने प्रभावित परिवारों का हालचाल जाना और उन्हें भरोसा दिलाया कि राहत एवं पुनर्वास कार्यों में किसी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जरूरतमंद परिवारों तक सहायता तेजी से पहुंचाई जाए।

मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित एक परिवार के घर पहुंचकर भी स्थिति देखी। परिवार के सदस्यों से बातचीत कर उन्होंने मकान और घरेलू सामान को हुए नुकसान की जानकारी ली। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि नुकसान का आकलन प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।
300 परिवारों को 10-10 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता
बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए मुख्यमंत्री ने बड़ी राहत की घोषणा की है। घरों में रखे सामान को नुकसान पहुंचने वाले करीब 300 परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10-10 हजार रुपये की अतिरिक्त आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह सहायता आरबीसी 6-4 के तहत पात्र परिवारों को मिलने वाली सहायता के अतिरिक्त होगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ से क्षतिग्रस्त मकानों, घरेलू सामान और अन्य संपत्तियों का शीघ्र आकलन किया जाए। पात्र प्रभावित परिवारों को आरबीसी 6-4 के प्रावधानों के तहत मुआवजा जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
कोंटा में भी बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा
मुख्यमंत्री ने कोंटा क्षेत्र का भी दौरा किया। लगातार बारिश के बाद सबरी नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे के गांवों और कोंटा नगर पालिका के चार वार्डों में जलभराव की स्थिति बनी थी। प्रभावित लोगों के लिए कोंटा क्षेत्र में 19 राहत केंद्र बनाए गए हैं, जहां भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से लोगों की जांच की जा रही है। जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए पेयजल स्रोतों का क्लोरीनेशन और स्वच्छता संबंधी जरूरी उपाय भी किए जा रहे हैं। जरूरतमंद परिवारों को सूखा राशन और गर्म कपड़े उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
“हर पात्र परिवार तक पहुंचे सहायता”
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राहत के बाद पुनर्वास कार्यों में भी तेजी लाई जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी पात्र परिवार सरकारी सहायता से वंचित नहीं रहना चाहिए। क्षति के आकलन से लेकर सहायता राशि के वितरण तक पूरी प्रक्रिया संवेदनशीलता और तत्परता के साथ पूरी करने के निर्देश दिए गए।
गौरतलब है कि 23 और 24 सितंबर को हुई भारी बारिश के बाद सुकमा जिले के कई हिस्सों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति बनी थी। इसके बाद प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य लगातार चलाए जा रहे हैं।
इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत सहित जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।