
कोरबा(सेंट्रल छत्तीसगढ़):- 19 जुलाई 2021 एनटीपीसी कार्यकारी निदेशक श्री विस्वरूप बसु के बताए अनुसार वैष्विक महामारी कोरोना काल की दूसरी लहर में भी अप्रैल 2021 से जून 2021 तीन माह के अवधि में 97.61 प्रतिशत प्लांट लोड फैक्टर के साथ 5542.629 मिलियन बिजली उत्पादन कर एनटीपीसी कोरबा ने पूरा देश में प्रथम स्थान हासिल किया है। पिछले वित्त वर्ष के उत्पादित बिजली से इस वर्ष 1.12 प्रतिशत ज्यादा है।एनटीपीसी कोरबा 200 मेगावाट के 03 व 500 मेगावाट के 04 यूनिट कुल 2600 मेगावाट से बिजली उत्पादन हो रहा है। जो कि कोरबा के लिए गौरव की बात है।
एनटीपीसी के झुठा आश्वासन से आश्रित ग्रामवासी परेशान
एनटीपीसी कोरबा विगत 38 वर्षों से अनेक ग्रामवासियों किसानी जमीन लेकर प्रचालन पर है।झुठा आश्वासन देकर जमीन के एवज में किसानों को भले ही मुआवजा मिल गया हो लेकिन आश्रित ग्राम होने के नाते 38 वर्ष बीत जाने के बाद भी जो सुविधा मिलना चाहिए वो नहीं मिलने के कारण आश्रित ग्रामीण खासा नाराज हैं और खुद को ठगा महसूस कर रहें हैं।
एनटीपीसी के मनमानी से ग्रामीण त्रस्त
एनटीपीसी कोरबा को छोड़ दें तो प्रदेश में स्थापित एनटीपीसी सीपत,लारा के कम समय में भी चहुओर आश्रित ग्रामों की विकास नजर आता है। लेकिन एनटीपीसी कोरबा की मनमानी इस कदर हावी है कि ग्रामीणों के चलने के लिए भी जो रास्ता है उसमें भी दीवार खड़ा कर,वेरिकेट लगाकर अवरोध उत्पन्न कर रहें हैं एवं ग्राम के प्रवेश द्वार का सौंदर्य को धूमिल कर रहा है।जिस रास्ते पर ये सब किया जा रहा है उस रास्ते से एनटीपीसी के कर्मचारियों के साथ -साथ कार्यकारी निदेशक श्री बसु भी दिन में कमसे कम चार बार आवागमन करते हैं फिर भी मौन हैं। ठीक वैसे ही गोपालपुर गेट को भी बंद कर दिया गया है जिससे लोगों में आक्रोश व्याप्त हो रहा है।
एनटीपीसी से बताए जिम्मेदार कौन
आश्रित ग्राम जमनीपाली के ग्रामीण व जनप्रतिनिधियों के बारम्बार निवेदन के पश्चात एनटीपीसी सीएसआर मद से सामुदायिक भवन बनाने का कार्य प्रारंभ किया था लेकिन सीमेंट नहीं होने का हवाला देकर काम को बंद कर दिया है।जिस जगह पर कार्य प्रारंभ किया था वहाँ बड़े-बड़े गढ्डे खोद कर छोड़ दिया है सुरक्षा के दृष्टिकोण से कोई सुरक्षा नहीं है। उस गड्ढे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है जिसका जिम्मेदार कौन होगा इस लिए ग्रामीण भी त्रस्त है और एनटीपीसी प्रबंधन कोरबा से कार्य को शीघ्र संपन्न कराने की आग्रह रहें हैं।