रायपुर, 17 सितंबर 2026। जमीन और राजस्व से जुड़े पुराने दस्तावेजों को संभालकर रखने और आम लोगों को इन तक आसानी से पहुंच देने के लिए छत्तीसगढ़ में वसुंधरा परियोजना पर काम शुरू हो गया है। परियोजना के तहत जिला और तहसील स्तर के रिकॉर्ड रूम को आधुनिक बनाया जाएगा और वर्षों पुराने महत्वपूर्ण राजस्व दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किया जाएगा।
मंत्रालय महानदी भवन में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में परियोजना की कार्ययोजना पर चर्चा की गई। मुख्य सचिव विकासशील ने राजस्व मामलों में एकरूपता और स्पष्टता के साथ रिकॉर्ड के व्यवस्थित रखरखाव पर जोर दिया। परियोजना की शुरुआत चयनित जिलों से होगी और चरणबद्ध तरीके से इसे प्रदेश के सभी 33 जिलों तक ले जाने की योजना है।
खसरा से लेकर पुराने नक्शे तक होंगे सुरक्षित
डिजिटलीकरण के दायरे में राजस्व विभाग के कई महत्वपूर्ण अभिलेख आएंगे। अधिकार अभिलेख पंजी, बंदोबस्त एवं चकबंदी मिसल, निस्तार पत्रक, खसरा, राजस्व न्यायालय के आदेश, मूल ग्राम नक्शे और संशोधन पंजी को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा।
वर्ष 2020 से पहले के खसरा पंचशाला अभिलेख और किश्तबंदी खतौनी की भी स्कैनिंग तथा डाटा एंट्री की जाएगी। इससे पुराने कागजी दस्तावेजों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और जरूरत के समय संबंधित रिकॉर्ड तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।
घर बैठे मिल सकती हैं राजस्व सेवाएं
वसुंधरा परियोजना के तहत तैयार डिजिटल रिकॉर्ड भंडार को सेवा सेतु पोर्टल से जोड़ने की योजना है। इसके जरिए नागरिक ऑनलाइन आवेदन करने, शुल्क जमा करने, प्रमाणित डिजिटल प्रतियां प्राप्त करने और अपने आवेदन की स्थिति ट्रैक करने जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य राजस्व सेवाओं को अधिक सरल और पारदर्शी बनाना है, ताकि दस्तावेजों के लिए कार्यालयों में अनावश्यक आवाजाही कम हो और रिकॉर्ड से जुड़ी सेवाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध हो सकें।
AI बताएगा, पुराने रिकॉर्ड में क्या दर्ज है
वसुंधरा परियोजना में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी प्रस्तावित है। रिकॉर्ड रूम में दस्तावेजों को बारकोड आधारित वर्गीकरण और डिजिटल लोकेशन के जरिए व्यवस्थित किया जाएगा। इससे किसी दस्तावेज को रिकॉर्ड रूम में तलाशने की प्रक्रिया भी आसान होगी।
पुराने और हस्तलिखित दस्तावेजों की जानकारी को खोजने योग्य बनाने के लिए OCR तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ ही AI आधारित सर्च सुविधा विकसित करने की योजना है, जिससे बड़ी संख्या में मौजूद दस्तावेजों में जरूरी रिकॉर्ड को तेजी से तलाशा जा सकेगा।
पहले चयनित जिले, फिर पूरे छत्तीसगढ़ में विस्तार
परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में चयनित जिलों के राजस्व अभिलेखों का पूर्ण डिजिटलीकरण किया जाएगा। इसके बाद इस व्यवस्था का विस्तार प्रदेश के सभी 33 जिलों में किया जाएगा।
वसुंधरा परियोजना के जरिए पुराने राजस्व रिकॉर्ड के संरक्षण के साथ नागरिकों को डिजिटल माध्यम से बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। आने वाले समय में जमीन और राजस्व से जुड़े दस्तावेजों को हासिल करने तथा सुरक्षित रखने की प्रक्रिया में इसका सीधा असर दिखाई दे सकता है।