कोरबा, 17 जुलाई। कभी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोरबा के विद्यार्थियों को रायपुर, बिलासपुर, नागपुर, कोटा या दिल्ली जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। आज वही कोरबा अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों के दम पर नई पहचान बना रहा है। NEET-UG 2026 के परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि यदि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुभवी मार्गदर्शन और प्रतिस्पर्धी माहौल स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो, तो छोटे शहरों और ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थी भी राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।
इसी विश्वास को मजबूती देते हुए Physics Wallah विद्यापीठ एवं पाठशाला, कोरबा ने इस वर्ष जिले में उल्लेखनीय सफलता दर्ज की है। संस्थान की छात्रा अराध्या अग्रवाल ने 614 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक (AIR) 6261 हासिल की और कोरबा जिला टॉपर बनने का गौरव प्राप्त किया। वहीं संस्थान के छह विद्यार्थियों ने 500 से अधिक अंक अर्जित कर जिले का नाम रोशन किया है।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की मजबूत संभावना
शिक्षा विशेषज्ञों और पिछले वर्षों के कटऑफ के विश्लेषण के अनुसार संस्थान के लगभग 10 विद्यार्थियों के विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की प्रबल संभावना जताई जा रही है। वहीं जिला टॉपर अराध्या अग्रवाल के AIIMS देवघर अथवा AIIMS मदुरै जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में चयन की भी मजबूत उम्मीद व्यक्त की जा रही है।
संस्थान के प्रमुख सफल विद्यार्थियों में अराध्या अग्रवाल (614), प्रणय कुमार साहू (576), सोहम गोयल (557), हर्ष श्रीवास (536), नजमा बानो (528), अखिल रंजन यादव (515), अमित यादव (472), दीपेश कुमार (466), ममता सिंह (392) तथा युवराज सिंह खुरसेंगा (361) शामिल हैं।
‘कंसिस्टेंसी’ बनी सफलता की सबसे बड़ी ताकत
परिणाम घोषित होने के बाद आयोजित “सफलता उत्सव एवं प्रतिभा सम्मान समारोह” केवल अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान भर नहीं था, बल्कि यह उन संघर्षों, अनुशासन और निरंतर मेहनत का उत्सव था जिसने इन विद्यार्थियों को सफलता तक पहुंचाया।
कार्यक्रम में सफल विद्यार्थियों ने खुलकर अपनी तैयारी के अनुभव साझा किए। सभी की कहानियां अलग थीं, लेकिन एक बात समान थी—लगातार अभ्यास, नियमित टेस्ट और अपनी गलतियों से सीखने की आदत।
जिला टॉपर अराध्या अग्रवाल ने कहा कि यदि किसी विद्यार्थी का लक्ष्य डॉक्टर बनना है तो उसे पूरे वर्ष बिना रुके मेहनत करनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा—
“यदि आपने तय कर लिया है कि आपको NEET निकालना है, तो बस संघर्ष करते रहिए। कठिनाइयाँ आएँगी, लेकिन जो विद्यार्थी लगातार प्रयास करते हैं, सफलता अंततः उन्हीं को मिलती है। Just Keep Fighting… करते-करते हो जाता है।”
उनकी यह बात उपस्थित विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी।
कमजोर विषय भी बन सकता है सबसे बड़ी ताकत
प्रणय कुमार साहू ने बताया कि तैयारी के शुरुआती दौर में फिजिक्स उनका सबसे कमजोर विषय था। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय लगातार अभ्यास किया, सौ से अधिक टेस्ट दिए और हर टेस्ट के बाद अपनी गलतियों का विश्लेषण किया। परिणाम यह हुआ कि वही विषय उनकी सफलता की मजबूत नींव बन गया।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपनी समस्याओं को छिपाने के बजाय शिक्षकों से खुलकर साझा करें, क्योंकि सही समय पर मिला मार्गदर्शन पूरी दिशा बदल सकता है।
दो साल तक नहीं छोड़ी एक भी क्लास और टेस्ट
हर्ष श्रीवास ने अनुशासन की मिसाल पेश करते हुए बताया कि उन्होंने स्कूल और कोचिंग दोनों को संतुलित रखते हुए लगातार दो वर्षों तक न तो कोई क्लास छोड़ी और न ही कोई टेस्ट। उन्होंने बोर्ड परीक्षा में 92 प्रतिशत अंक प्राप्त किए और NEET में भी शानदार प्रदर्शन किया।
उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि केवल बोर्ड परीक्षा के अंक ही लक्ष्य नहीं होने चाहिए, बल्कि मजबूत कॉन्सेप्ट विकसित करना अधिक जरूरी है।
कम अंक आए, आत्मविश्वास डगमगाया… फिर भी नहीं रुके
अखिल रंजन यादव ने बताया कि शुरुआती टेस्टों में अपेक्षा से कम अंक आने के कारण उनका आत्मविश्वास कमजोर पड़ गया था। लेकिन उन्होंने टेस्ट देना बंद नहीं किया। लगातार अभ्यास और प्रतिस्पर्धी वातावरण ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
दीपेश कुमार ने भी स्वीकार किया कि कई बार कम अंक आने से मनोबल गिरा, लेकिन उन्होंने अपनी कमजोरियों पर काम करना जारी रखा। वहीं अमित यादव ने Re-NEET के दौरान लगभग 150 से 200 अंकों का सुधार कर यह साबित किया कि यदि विद्यार्थी ईमानदारी से टेस्ट का विश्लेषण करे तो परिणाम पूरी तरह बदल सकते हैं।
सफलता का फॉर्मूला—हर क्लास, हर टेस्ट और हर गलती का विश्लेषण
कार्यक्रम के दौरान अकादमिक हेड अतुल सिंह ने विद्यार्थियों की सफलता का विश्लेषण करते हुए कहा कि सभी सफल छात्रों में तीन बातें समान थीं—
- 100 प्रतिशत क्लास अटेंडेंस
- 100 प्रतिशत टेस्ट पार्टिसिपेशन
- हर टेस्ट का गंभीर विश्लेषण
उन्होंने कहा कि NEET जैसी परीक्षा में कोई शॉर्टकट नहीं होता। नियमित अध्ययन, अनुशासन और अपनी कमजोरियों पर लगातार काम करने वाले विद्यार्थी ही अंततः सफलता प्राप्त करते हैं।
ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की प्रतिभाओं पर जताया भरोसा
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह ने सफल विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल एक संस्थान की सफलता नहीं, बल्कि पूरे कोरबा जिले की शैक्षणिक क्षमता का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि कोरबा एक आदिवासी बहुल जिला है, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों में अध्ययन करते हैं। इन बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। यदि उन्हें भी गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वे भी देश के प्रतिष्ठित संस्थानों तक पहुंच सकते हैं।

डॉ. पवन सिंह ने विशेष रूप से राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले विशेष पिछड़ी जनजातीय समूह पहाड़ी कोरबा और बिरहोर समुदाय के बच्चों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनमें भी राष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करने की पूरी क्षमता मौजूद है।
“प्रतिभा किसी शहर, वर्ग या आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होती। सही मार्गदर्शन मिले तो कोरबा के वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी AIIMS, IIT सहित देश के सर्वोच्च संस्थानों तक पहुंच सकते हैं।”
अभिभावकों ने जताया विश्वास
कार्यक्रम में मौजूद अभिभावकों ने कहा कि संस्थान ने केवल परीक्षा की तैयारी नहीं कराई, बल्कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन और बड़े लक्ष्य निर्धारित करने का साहस भी विकसित किया।
समारोह के दौरान सफल विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों का सम्मान किया गया। पूरे परिसर में उत्साह, गर्व और भावनात्मक माहौल देखने को मिला।
कोरबा की बदलती तस्वीर का संदेश
NEET-2026 का यह परिणाम केवल अंकों की सूची नहीं है, बल्कि यह उस बदलते शैक्षणिक वातावरण की कहानी है जिसमें अब कोरबा जैसे शहर भी राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुभवी शिक्षक, नियमित मूल्यांकन और सकारात्मक प्रतिस्पर्धा का माहौल मिले, तो वे महानगरों के विद्यार्थियों से किसी भी मायने में पीछे नहीं हैं।
कोरबा की यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में जिले के हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनेगी और संभवतः यह उस नई शैक्षणिक क्रांति की शुरुआत है, जिसमें छोटे शहरों के सपने भी देश के सबसे बड़े संस्थानों तक पहुंचने लगे हैं।