
कोरबा / पाली / सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ : कोरबा जिले के पाली जनपद पंचायत में पदस्थ प्रभारी सीईओ मोनेश देवांगन की मनमानी और प्रशासनिक रसूख का एक ऐसा खौफनाक और शर्मनाक चेहरा सामने आया है, जिसने सूबे के मुखिया के सम्मान को भी तार-तार कर दिया। मामला सिर्फ 5 महीने से ट्रांसफर आर्डर को ठेंगा दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके कारनामों की फेहरिस्त सीधे राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अपमान से जुड़ी हुई है।
ताजा तस्वीरों.से यह बड़ा खुलासा हुआ है कि प्रसिद्ध ‘पाली महोत्सव’ के दौरान प्रभारी सीईओ मोनेश देवांगन की देखरेख में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के चेहरे वाले सरकारी फ्लैक्स और पोस्टर को कबाड़ की तरह इस्तेमाल किया गया। हद तो तब हो गई जब इस पोस्टर को एक अस्थायी/मोबाइल शौचालय (महिला/पुरुष टॉयलेट) के ऊपर धूप और पानी से बचने के लिए ‘शेड’ (छत) के रूप में ठोक दिया गया।

तस्वीरें बयां कर रही हैं लापरवाही का सच
पोर्टल को मिली एक्सक्लूसिव तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है:
- शौचालय की छत पर मुख्यमंत्री: तस्वीर में साफ दिख रहा है कि महिला/पुरुष शौचालय के ऊपर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मुस्कुराती हुई तस्वीर वाला बड़ा सरकारी फ्लैक्स फटा हुआ और शेड के रूप में तना हुआ है।
- प्रशासनिक अंधेरगर्दी: तस्वीर में उस पूरे टॉयलेट स्ट्रक्चर को देखा जा सकता है, जिसे जनहित के पैसों से वीआईपी आयोजन में लाया गया था, लेकिन वहां राज्य के सर्वोच्च जनप्रतिनिधि के पोस्टर का इस कदर अपमान किया गया।
इस महागुस्ताखी और शासकीय प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाने के बाद भी साहब के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिर क्यों? क्योंकि साहब जिला प्रशासन के आला अफसरों के ‘मनपसंद और चहेते’ अधिकारी जो ठहरे!
‘मनपसंद अधिकारी’ होने का मिल रहा है भरपूर फायदा
आमतौर पर किसी अदने से कर्मचारी से भी अगर मुख्यमंत्री के पोस्टर या गरिमा को ठेस पहुंचती है, तो उसे तत्काल सस्पेंड कर दिया जाता है। लेकिन पाली जनपद में नियम और निष्पक्षता की परिभाषा अलग है। सूत्रों का कहना है कि मोनेश देवांगन को जिला पंचायत के आला अधिकारियों का ऐसा वरदहस्त प्राप्त है कि वे मुख्यमंत्री के अपमान से लेकर भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों तक को डंके की चोट पर हजम कर जाते हैं।
यही वजह है कि 5 महीने पहले उनका ट्रांसफर पड़ोसी जिले ‘शक्ति’ में हो जाने के बावजूद उन्हें कुर्सी से हिलाने की हिम्मत जिला पंचायत सीईओ नहीं दिखा पा रहे हैं।
सीएम हाउस तक पहुंचेगा अपमान का यह मामला?
एक तरफ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय प्रदेश में सुशासन और प्रशासनिक पारदर्शिता का दावा कर रहे हैं, वहीं जमीनी स्तर पर उनके ही नाम और चेहरे को शौचालय की छत बनाकर अफसरों द्वारा अपमानित किया जा रहा है। अब क्षेत्र में यह मांग उठने लगी है कि:
- मुख्यमंत्री के सम्मान से खिलवाड़ करने वाले इस अधिकारी पर एफआईआर (FIR) दर्ज क्यों नहीं की गई?
- उच्चाधिकारियों की ऐसी क्या मजबूरी है जो इस ‘मनपसंद’ अधिकारी की हर काली करतूत पर पर्दा डाल रहे हैं?
- क्या अब सीधे बिलासपुर कमिश्नर या स्वयं मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) इस अराजकता पर सीधे डंडा चलाएगा?
तबादले के बाद भी मलाईदार पोस्टिंग पर जमे रहना और मुख्यमंत्री के पोस्टर का ऐसा हश्र करना, यह साबित करता है कि कोरबा जिले के पाली में प्रशासन नहीं, बल्कि अफसरों की बेलगाम ‘मनमानी’ राज कर रही है।