रायपुर। नवा रायपुर के नकटी में शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर कांग्रेस का रोना-धोना और “गरीबों पर अत्याचार” वाली बयानबाजी फिर एक बार साबित करती है कि पार्टी वोट बैंक की राजनीति के लिए कानून और सार्वजनिक संपत्ति दोनों को कुर्बान करने को तैयार है।
सवाल कांग्रेस से:
- कांग्रेस शासन में ये अतिक्रमण कैसे बढ़े? – वर्षों तक जब कांग्रेस की सरकार थी, तब इन 29,700 वर्गफुट, 29,600 वर्गफुट जैसे विशाल कब्जों पर नजर क्यों नहीं पड़ी? नोटिस तो जारी होते रहे, लेकिन कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या ये कब्जाधारी कांग्रेस के वोट बैंक थे, इसलिए आंखें बंद रखी गईं?
- 14 करोड़ की सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले “गरीब” कैसे? –
कांग्रेस वाले इन कब्जाधारियों को “गरीब” बता रहे हैं, जिनमें कई ने करोड़ों कीमत की भूमि पर बड़े मकान बनाए, जमीन बेची और 50 लाख तक का निर्माण किया। क्या कांग्रेस को सचमुच यकीन है कि इतने बड़े भूखंडों पर कब्जा जमाने वाले गरीब होते हैं? या फिर ये गरीबी का राजनीतिक ढोंग है, जिसे कांग्रेस ने लंबे समय से पोषित किया? - कांग्रेस ने क्यों रोका नहीं?–
शासकीय भाटा/चरागाह भूमि पर स्कूल, अस्पताल या गौशाला जैसे सार्वजनिक निर्माण होने थे। लेकिन कांग्रेस के कार्यकाल में ये जमीनें व्यक्तिगत कब्जे में चली गईं। क्या कांग्रेस सरकार ने जानबूझकर इन अतिक्रमणों को बढ़ावा दिया या नजरअंदाज किया, ताकि वोट मिलते रहें?
हकीकत यह है कि जब कार्रवाई हुई, तब कांग्रेस वाले तुरंत “संवेदना” और “अत्याचार” का राग अलापने लगे। लेकिन सवाल यह है — जब ये कब्जे हो रहे थे, तब कहाँ थी उनकी संवेदना? ईमानदार मध्यमवर्गीय परिवार, जो छोटा प्लॉट खरीदने के लिए जीवन भर EMI भरता है, उसके टैक्स से बनी सरकारी जमीन को कांग्रेस ने वोट बैंक के लिए लुटने दिया?
प्रशासन ने प्रभावितों को ₹8 लाख वाले फ्लैट मालिकाना हक के साथ दिए हैं, फिर भी कांग्रेस इसे मुद्दा बना रही है। पार्टी को जवाब देना चाहिए:
- कांग्रेस ने अपने शासन में इन कब्जाधारियों के खिलाफ कितनी कार्रवाई की?
- कितने बड़े कब्जों को चिन्हित कर हटाया?
- या फिर “गरीबों का मसीहा” बनने के चक्कर में सरकारी जमीनों को लुटने दिया?
नकटी की घटना कोई isolated मामला नहीं है। यह कांग्रेस की उस पुरानी नीति का उदाहरण है, जिसमें अतिक्रमणकर्ताओं को संरक्षण देकर वोट जुटाए जाते हैं, जबकि ईमानदार नागरिकों का हक मार लिया जाता है।
कांग्रेस को स्पष्ट जवाब देना चाहिए: क्या आप सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को बढ़ावा देते हैं? क्या आप कानून के राज के बजाय वोट बैंक के राज में विश्वास रखते हैं?
अब समय है कि जनता कांग्रेस की इस दोगली नीति को पहचाने। गरीबी का ढोंग करके सरकारी संपत्ति हथियाने वालों को संरक्षण देना जनता के साथ धोखा है। कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए — चाहे वह कांग्रेस का वोट बैंक हो या कोई और।