DMF मद में लंबित भुगतानों पर घमासान :जनपद CEO पर कलेक्टर को गुमराह करने का आरोप, सदस्यों में भारी आक्रोश

कोरबा​[सेन्ट्रल छत्तीसगढ़] – जिले में जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद के तहत स्वीकृत और पूर्ण हो चुके निर्माण कार्यों के भुगतान को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जनपद सदस्यों द्वारा निर्माण कार्यों की यूनिक ‘वर्क आईडी’ (Work ID) की मांग किए जाने के मामले में नया मोड़ आ गया है। आरोप है कि जनपद मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) द्वारा जिला प्रशासन और कलेक्टर को गुमराह करते हुए गलत जानकारी भेजी गई है, जिससे जनपद सदस्यों में भारी नाराजगी है।

​क्या है पूरा मामला?

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, जनपद सदस्यों ने क्षेत्र में पूर्ण हो चुके विभिन्न निर्माण कार्यों की ‘वर्क आईडी’ की आधिकारिक जानकारी मांगी थी। जिस तरह मनरेगा (MGNREGA) के तहत हर छोटे-बड़े कार्य की एक विशिष्ट आईडी होती है, ठीक उसी तरह DMF मद के कार्यों की भी आईडी होती है। सदस्य इस आईडी के जरिए यह पता लगाना चाहते थे कि आखिर कार्य पूर्ण होने के बावजूद ठेकेदारों और मजदूरों का भुगतान अब तक क्यों लंबित है और फाइलें किस स्तर पर अटकी हुई हैं।

​मांग ‘वर्क आईडी’ की, दे दी ‘CEO की आईडी’

​मामले में हास्यास्पद और गंभीर स्थिति तब पैदा हो गई जब जनपद सदस्यों को जानकारी देने के बजाय, जनपद CEO द्वारा जिला प्रशासन (कलेक्टोरेट) को एक अजीबोगरीब जवाब भेज दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, CEO ने कलेक्टर को दिए जवाब में कार्यों की ‘वर्क आईडी’ के बजाय खुद ‘जनपद CEO की आईडी’ मांगे जाने का उल्लेख कर दिया।

जनपद सदस्यों का कहना है: “हमने प्रशासन से जनता के कार्यों और उनके लंबित भुगतानों की ‘वर्क आईडी’ मांगी थी ताकि पारदर्शिता बनी रहे, न कि किसी अधिकारी की व्यक्तिगत या लॉगिन आईडी। CEO द्वारा कलेक्टर महोदय को सरासर गलत और भ्रामक जानकारी दी गई है, जो कि कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही को दर्शाता है।”

​जानकारी न मिलने से विकास कार्य ठप

​जनपद सदस्यों का आरोप है कि लंबे समय से जानकारी दबाकर रखी जा रही है। भुगतान न होने के कारण धरातल पर विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ रहा है। सही जानकारी न मिलने के कारण अब सदस्यों का धैर्य जवाब दे रहा है।

​आगे क्या? सदस्यों के कड़े रुख के आसार

​अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इस पूरे घालमेल के सामने आने के बाद जिला कलेक्टर इस पर क्या संज्ञान लेते हैं। वहीं दूसरी ओर, गलत जानकारी दिए जाने से भड़के जनपद सदस्यों का आगामी दिनों में उग्र रवैया देखने को मिल सकता है। कयास लगाए जा रहे हैं कि सदस्य इस मामले को लेकर कलेक्टर से सीधे मुलाकात करेंगे और जनपद CEO के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आगामी जनपद बैठक का बहिष्कार या उग्र प्रदर्शन भी कर सकते हैं।