कोरबा: राखड़ बांध फूटने से बड़ा हादसा, मलबे में दबने से जेसीबी ऑपरेटर की मौत; प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप..

कोरबा। जनपद के झाबु नवागांव में एक भीषण हादसे ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया है। यहाँ स्थित एक राखड़ बांध (Ash Dyke) के अचानक फूटने से भारी मात्रा में राखड़ का मलबा फैल गया, जिसकी चपेट में आने से एक जेसीबी ऑपरेटर की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश है और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

हादसे का विवरण: जिंदा दफन हुआ हुलेश्वर

​जानकारी के अनुसार, मड़वारानी निवासी हुलेश्वर कश्यप घटना के समय बांध के पास जेसीबी से कार्य कर रहा था। इसी दौरान बांध का एक हिस्सा अचानक ढह गया और देखते ही देखते लाखों टन राखड़ के मलबे ने हुलेश्वर को अपनी चपेट में ले लिया। हुलेश्वर को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वह राखड़ के ढेर में जिंदा दफन हो गया।

रेस्क्यू ऑपरेशन: तीन की बची जान

​हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण और पुलिस प्रशासन मौके पर पहुँचे। युद्धस्तर पर शुरू किए गए रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे में फंसे 3 अन्य मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हालांकि, हुलेश्वर कश्यप को नहीं बचाया जा सका। पुलिस ने शव को मलबे से निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

प्रबंधन पर लापरवाही के गंभीर आरोप

​ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि राखड़ बांध की मरम्मत में भारी लापरवाही बरती जा रही थी।

  • बिना सुरक्षा मानक: कार्य के दौरान मजदूरों की सुरक्षा के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे।
  • तकनीकी चूक: बांध की जर्जर स्थिति के बावजूद सुरक्षा ऑडिट के बिना ही वहां काम कराया जा रहा था।

मुआवजा और प्रशासन की कार्रवाई

​घटना के बाद उपजे जनाक्रोश और जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे की घोषणा की गई है:

  • तत्काल सहायता: मृतक के परिजनों को 5 लाख रुपये नकद और 18 लाख रुपये का चेक प्रदान किया गया है।
  • कुल राशि: कुल 23 लाख रुपये की आर्थिक सहायता तत्काल प्रभाव से दी गई है।
  • जांच टीम: जिला प्रशासन ने हादसे के कारणों की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय टीम का गठन किया है, जो बांध की मजबूती और सुरक्षा मानकों की जांच करेगी।

सियासी गर्माहट: FIR की मांग

​युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष विकास सिंह और अन्य जनप्रतिनिधियों ने इस घटना पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। शुरुआत में परिजनों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। विकास सिंह ने दोटूक शब्दों में कहा है कि:

​”यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि प्रबंधन की लापरवाही से हुई हत्या है। हम मांग करते हैं कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं।”