
कोरबा ( सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ ) आमिर खान : क्षेत्र के तेलसरा पंचायत अंतर्गत आश्रित ग्राम जमनीमुड़ा में रेत माफियाओं का आतंक चरम पर है। यहाँ बहने वाली आहिरन नदी से रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन बिना किसी डर के 24 घंटे धड़ल्ले से जारी है। हैरानी की बात यह है कि प्रशासन की नाक के नीचे हो रहे इस खेल पर माइनिंग विभाग ने पूरी तरह से चुप्पी साधी हुई है।

निजी वसूली का अड्डा बना घाट
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नदी घाट पर एक ग्रामीण द्वारा दबंगई दिखाते हुए प्रति ट्रैक्टर 300 रुपये की अवैध वसूली की जा रही है। संबंधित व्यक्ति का तर्क है कि रेत उसकी निजी जमीन से निकाली जा रही है, इसलिए वह पैसा ले रहा है। हालांकि, सरकारी खनिज संपदा पर इस तरह की निजी वसूली ने कई कानूनी सवाल खड़े कर दिए हैं।

पंचायत की भूमिका संदिग्ध; ग्रामीणों में आक्रोश
गांव के भीतर से दिन-रात तेज रफ्तार ट्रैक्टरों के गुजरने से ग्रामीण भयभीत हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि:
- सरपंच-सचिव की चुप्पी: इतनी बड़ी मात्रा में अवैध परिवहन होने के बावजूद पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा इसे न रोकना उनकी मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
- 24 घंटे परिवहन: रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे तक ट्रैक्टरों का रेला लगा रहता है।
- दुर्घटना का डर: रिहायशी इलाकों और गलियों से तेज रफ्तार वाहन गुजरने के कारण कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
प्रशासनिक उदासीनता से बढ़े हौसले
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस अवैध कारोबार की शिकायत कई बार संबंधित अधिकारियों से की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। खनिज विभाग (Mining Department) की इस सुस्ती के कारण रेत माफिया बेखौफ होकर क्षेत्र में अवैध रेत खपा रहे हैं, जिससे शासन को लाखों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है।
”जब शासन-प्रशासन ही मौन हो, तो हम किससे गुहार लगाएं? गांव की शांति भंग हो चुकी है और नदी को छलनी किया जा रहा है।” – एक स्थानीय ग्रामीण
अब देखना यह होगा कि खबर प्रकाशित होने के बाद क्या खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन इस अवैध वसूली और उत्खनन पर लगाम लगाता है, या माफियाओं का यह ‘पीला कारोबार’ यूँ ही फलता-फूलता रहेगा।