कोरबा में पटवारी की ‘रिश्वत लिस्ट’ से किसान त्रस्त, जनदर्शन में शिकायत के बाद भी कार्रवाई सिफ़र

कोरबा/पाली ( सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ ): छत्तीसगढ़ सरकार के ‘जनदर्शन’ कार्यक्रम का उद्देश्य जनता की समस्याओं का त्वरित निराकरण करना है, लेकिन पाली विकासखण्ड के ग्राम मांगामार में यह दावा खोखला साबित हो रहा है। एक तरफ गरीब किसान न्याय की गुहार लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रिश्वतखोरी के आरोपों से घिरे पटवारी के हौसले बुलंद हैं।

मामला: 15 हजार दो, तब बनेगी वन पट्टे की पर्ची

​ग्राम मांगामार के निवासी पीड़ित किसान छन्दराम धनवार ने कलेक्टर जनदर्शन में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। छन्दराम के पास महज 0.121 हेक्टेयर वन पट्टे की कृषि भूमि है। आरोप है कि हल्का पटवारी राजेन्द्र साहू द्वारा इस जमीन की पर्ची बनाने और इसे ऑनलाइन करने के एवज में 15,000 रुपये की मांग की जा रही है।

  • ​पीड़ित पहले ही 1,500 रुपये दे चुका है।
  • ​पटवारी द्वारा उसके भाइयों (मंगल और पहारू) से भी क्रमशः 1,000 और 2,000 रुपये लिए जा चुके हैं।
  • ​इसके बावजूद, काम पूरा करने के लिए प्रति व्यक्ति 15-15 हजार रुपये की अतिरिक्त मांग की जा रही है।

सरपंच संघ ने खोला मोर्चा: “पटवारी ने तय कर रखी है अपनी रेट लिस्ट”

​इस मामले में केवल ग्रामीण ही नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि भी पटवारी की कार्यशैली से नाराज हैं। सरपंच संघ (पाली ब्लॉक) के अध्यक्ष छत्रपाल सिंह राज और केराकछार सरपंच श्रीमती जीवन बाई कंवर ने एसडीएम को सौंपे ज्ञापन में पटवारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं:

  1. नामांतरण और बटांकन: 10,000 से 20,000 रुपये तक की मांग।
  2. फौती नामांतरण: बिना पैसे के काम नहीं।
  3. हस्ताक्षर शुल्क: मृत्यु पंचनामा और वंशवृक्ष में हस्ताक्षर के लिए भी अवैध वसूली।
  4. अशिष्ट व्यवहार: ग्रामीणों के साथ अभद्र भाषा और असहयोगपूर्ण रवैया।

प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल

​हैरानी की बात यह है कि किसान छन्दराम ने 23 मार्च 2026 को कलेक्टर से शिकायत की और सरपंच ने 24 मार्च 2026 को एसडीएम को पत्र लिखा, लेकिन एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी पटवारी के विरुद्ध कोई जांच या ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

ग्रामीणों का कहना है: “हम गरीब मजदूर हैं, दो-तीन महीने मेहनत करके जो पैसा जोड़ते हैं, उसे पटवारी रिश्वत में मांग लेता है। अगर पैसा न दें, तो फाइल महीनों दबी रहती है।”