अहिरन नदी के मालदा घाट पर रात का सन्नाटा चीर रहे रेत माफियाओं के ट्रैक्टर.

कटघोरा/कोरबा ( सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ ) आशुतोष शर्मा : जब पूरा शहर सोता है, तब अहिरन नदी के सीने को चीरने का खेल शुरू होता है। कटघोरा क्षेत्र के मालदा घाट पर रेत माफियाओं का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि रात के अंधेरे में दर्जनों ट्रैक्टरों की गूँज सुनाई देती है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है, जिससे मिलीभगत की बू आ रही है।

मालदा घाट बना अवैध उत्खनन का ‘हब’

​अहिरन नदी का मालदा घाट इन दिनों अवैध रेत खनन का मुख्य केंद्र बन चुका है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, सूर्यास्त के बाद माफियाओं की सक्रियता बढ़ जाती है। रात भर ट्रैक्टरों की लंबी कतारें लगी रहती हैं, जो बिना किसी रॉयल्टी या वैध दस्तावेज के नदी से रेत चोरी कर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं।

माफिया का सनसनीखेज दावा: “साहब को पहुँचता है हिस्सा”

​रिपोर्टिंग के दौरान जब रेत के इस अवैध कारोबार से जुड़े कुछ लोगों से बात की गई, तो उन्होंने बेहद चौंकाने वाला दावा किया। माफियाओं का कहना है कि उन्हें प्रशासन का कोई डर नहीं है क्योंकि खनिज विभाग (Minerals Department) और स्थानीय पुलिस के कुछ नुमाइंदों तक “महीना” या “हिस्सा” पहुँच जाता है।

“हमे कोई नहीं रोकता, सबका रेट फिक्स है। ऊपर तक पैसे देते हैं तब जाकर रात को काम चलता है।”रेत माफिया से जुड़े एक सूत्र का दावा

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

​नदी का जलस्तर और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecology) इस अंधाधुंध अवैध उत्खनन से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसके बावजूद, खनिज विभाग और पुलिस प्रशासन इस ओर से आँखें मूँदे बैठा है। क्या प्रशासन को वाकई इस बात की खबर नहीं है, या फिर माफिया का यह दावा सच है कि व्यवस्था ही इस खेल में शामिल है?

खतरे में अहिरन नदी का अस्तित्व

​अवैध उत्खनन के कारण नदी के घाट गहरे और खतरनाक होते जा रहे हैं। यदि जल्द ही इस पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में अहिरन नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है और भूजल स्तर में भारी गिरावट आ सकती है।