कोरबा के वनांचल में बेखौफ लुटेरों का आतंक: कहीं चाकू तो कहीं डंडों से हमला कर राहगीरों को लूटा, लगातार वारदातों से ग्रामीणों में दहशत; पुलिस गश्त पर उठे सवाल

कोरबा ( सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ ):   जिले के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में इन दिनों राहजनी, लूटपाट और जानलेवा हमले की घटनाओं ने आम जनजीवन को दहशत में डाल दिया है। कटघोरा और पाली थाना क्षेत्र से लगातार सामने आ रही एक जैसी वारदातों ने पुलिस की सक्रियता और रात्रि गश्त पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सन्नाटे और जंगल वाले रास्तों पर शाम ढलते ही अज्ञात बदमाशों का गिरोह सक्रिय हो जाता है, जो राहगीरों को घेरकर बर्बरतापूर्वक मारपीट कर मोबाइल, नकदी और जेवरात लूट रहा है।

हालिया प्रमुख वारदातें: दहशत की तीन बानगी

  • मामला 1: पाली थाना क्षेत्र (तीनमेड़ा–रंगोले जंगल मार्ग): पाली से अपने गांव बगमडू लौट रहे बाइक सवार युवकों (हर प्रसाद और संतोष सरोटिया) का रास्ता रोककर तीन अज्ञात नकाबपोशों ने कॉलर पकड़कर उन्हें जंगल की ओर खींच लिया। बदमाशों ने मोबाइल का पासवर्ड (PhonePe/UPI लॉक) पूछने के बाद उन पर डंडों व लात-घूंसों से बेरहमी से हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल संतोष को नाजुक हालत में अस्पताल रेफर किया गया। पाली पुलिस ने बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की है।
  • मामला 2: कटघोरा क्षेत्र (तानाखार–बरतराई मार्ग): तानाखार और बरतराई के बीच सुनसान रास्ते पर जा रहे एक परिवार को बेखौफ बदमाशों ने अपना निशाना बनाया। परिवार के सदस्यों के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की गई और महिलाओं के जेवरात व नकदी लूटकर बदमाश आसानी से फरार हो गए। इस घटना से क्षेत्र के परिवारों में भारी रोष है।
  • मामला 3: कटघोरा थाना क्षेत्र (सिंधिया–कोरबी जंगल): प्रतिमा विसर्जन देखकर रात में बाइक से लौट रहे तीन युवकों (युवराज, देव दास और जिगर महत) को तीन अज्ञात युवकों ने बहाने से रुकवाया और अचानक चाकू निकालकर उनकी गर्दन पर अड़ा दिया। जान से मारने की धमकी देकर लुटेरों ने तीनों के महंगे मोबाइल फोन (आईफोन, मोटोरोला और रेडमी) छीन लिए।

रात में निकलने से कतरा रहे ग्रामीण, छाई दहशत

लगातार हो रही इन सिलसिलेवार घटनाओं से पाली, कटघोरा, पोड़ी उपरोड़ा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में गहरा खौफ पसर गया है। शाम होते ही लोग जंगलों से गुजरने वाले मार्गों पर अकेले या दोपहिया वाहनों से सफर करने से कतरा रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल कुछ घटनाएं नहीं हैं, बल्कि अंदरूनी इलाकों में छोटी-मोटी लूट और छिनतई के कई मामले तो थाने तक पहुंचते ही नहीं हैं।

जागरूकता अभियान के बाद भी अपराध क्यों?

एक तरफ जिला पुलिस द्वारा समय-समय पर जन-जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और कम्युनिटी पुलिसिंग के तहत ग्रामीणों के बीच संवाद बढ़ाया जा रहा है। इसके बावजूद वनांचल क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही इन वारदातों ने व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया है:

  1. सुनसान मार्गों पर रात्रि गश्त का अभाव: जंगलों और घाटियों से गुजरने वाले मुख्य मार्गों पर पुलिस की नियमित पेट्रोलिंग नदारद रहती है, जिसका फायदा लुटेरे उठाते हैं।
  2. सड़क और मोबाइल नेटवर्क की कमी: वनांचल के कई रास्तों पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट नहीं है और मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने के कारण आपात स्थिति में पीड़ित तुरंत पुलिस या परिजनों से संपर्क नहीं कर पाते।
  3. अवैध नशा और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा: अंदरूनी ढाबों और सुनसान जंगलों के आसपास शराब व अन्य नशीले पदार्थों के सेवन के बाद असामाजिक तत्व लूट की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
  4. कड़ी कानूनी कार्रवाई में देरी: कई मामलों में तुरंत एफआईआर दर्ज न होना या आरोपियों की त्वरित गिरफ्तारी न होने से लुटेरों के हौसले बुलंद हैं।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि संवेदनशील जंगल मार्गों पर तुरंत पुलिस पिकेट, अस्थायी चेक-पॉइंट और लगातार रात्रि गश्त बढ़ाई जाए, ताकि आम जनता बिना किसी भय के सफर कर सके।