
राजस्व पटवारी संघ की जिला स्तरीय बैठक में पटवारियों पर बढ़ रहे मानसिक दबाव, अन्य विभागों के कार्य थोपे जाने और संसाधनों की कमी को लेकर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया गया। बैठक में विभिन्न तहसीलों के पटवारी प्रतिनिधि शामिल हुए और अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन के समक्ष बात रखी।
मुख्य मुद्दे एवं मांगें:
समय-सीमा और गिरदावरी का दबाव: शासन द्वारा डिजिटल गिरदावरी (ईसीएस) कार्य के लिए पर्याप्त समय दिया गया है, लेकिन स्थानीय अधिकारियों द्वारा इसे महज कुछ ही दिनों में पूरा करने का अनुचित दबाव बनाया जा रहा है।
एग्रीस्टैक कार्य का बोझ: एग्रीस्टैक योजना का नोडल विभाग कृषि विभाग और वीएलई होने के बावजूद, किसानों के पंजीयन और आईडी का पूरा काम बिना किसी अतिरिक्त सुविधा के पटवारियों पर थोप दिया गया है।
बरसात में नक्शा बटांकन स्थगित करने की मांग: खेतों में पानी भरे होने और फसल लगी होने के कारण बारिश के मौसम में मौके पर नापजोख करना संभव नहीं है। लक्ष्य पूरा न होने पर वेतन रोकने व निलंबन की चेतावनियों पर संघ ने कड़ा विरोध जताया है।
अवकाश के दिनों में बैठकें: 5-दिवसीय कार्य सप्ताह के बावजूद शनिवार, रविवार और शासकीय छुट्टियों पर बैठकें आयोजित करने और तत्काल रिपोर्ट मांगने की परंपरा बंद करने की मांग की गई।
जियो-ट्रैकिंग उपस्थिति पर आपत्ति: सुबह 10:00 बजे और शाम 5:30 बजे कार्यालय में उपस्थिति दर्ज कराने की अनिवार्यता से मैदानी (फील्ड) कार्य और किसानों की सेवाएं प्रभावित होने की बात कही गई।
पटवारी संघ ने स्पष्ट किया कि बिना संसाधन उपलब्ध कराए और नियमावली के विपरीत अतिरिक्त कार्य थोपे जाने से पटवारियों के साथ-साथ आम किसानों का काम भी प्रभावित हो रहा है। संघ ने इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है।
