छत्तीसगढ़: 10 वर्षों से कौशल विकास संवार रहे व्यावसायिक प्रशिक्षक खुद असुरक्षित, 16 सूत्रीय मांगों को लेकर खोला मोर्चा

जांजगीर-चांपा / रायपुर:छत्तीसगढ़ के शासकीय विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा के जरिए छात्रों का भविष्य संवार रहे व्यावसायिक प्रशिक्षक (Vocational Trainers) आज खुद के भविष्य को लेकर भारी असमंजस और आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। ‘छत्तीसगढ़ नवीन व्यावसायिक प्रशिक्षक कल्याण संघ’ ने अपनी 16 सूत्रीय मांगों को लेकर शासन-प्रशासन के समक्ष विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।

​संघ के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश कुमार साहू एवं सचिव ने बताया कि विगत 10 वर्षों में उनके मानदेय में केवल 3,000 रुपये तक की ही नाममात्र वृद्धि हुई है। वहीं, निजी कंपनियों के मनमाने रवैये और विभागीय उदासीनता के कारण 1,029 प्रशिक्षकों के सामने सेवा सुरक्षा का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

प्रमुख मांगें और जमीनी समस्याएं:

  • 1029 प्रशिक्षकों की सेवा सुरक्षा: नवीन निविदा में शामिल सभी कंपनियों को सख्त निर्देश दिए जाएं कि पूर्व से कार्यरत सभी 1,029 प्रशिक्षकों को यथावत रखा जाए तथा लक्ष्य कंपनी द्वारा बिना ठोस कारण हटाए गए 4 प्रशिक्षकों को तुरंत बहाल किया जाए।
  • मानदेय कटौती पर रोक: हेल्थ केयर ट्रेड के 121 अनुभवी प्रशिक्षकों का मानदेय ₹23,000 से घटाकर ₹20,000 कर दिया गया है, जिसे तत्काल पूर्ववत ₹23,000 किया जाए।
  • स्वीकृत मानदेय व एरियर्स का भुगतान: PAB 2026-27 के अनुसार स्वीकृत पूरी राशि का लाभ प्रशिक्षकों को दिया जाए और PAB 2025-26 के ₹12,000 वार्षिक एरियर्स सहित मई-जून के लंबित मानदेय का एकमुश्त भुगतान हो।
  • इंडस्ट्रियल विजिट व गेस्ट लेक्चर बजट में कटौती बंद हो: छात्रों की गतिविधियों के लिए खुद की जेब से राशि खर्च करने के बावजूद कंपनियों द्वारा 25% से 40% की कटौती की जा रही है। Indus और Gram Tarang कंपनियों के पास अटकी राशि तुरंत जारी की जाए।
  • 478 स्कूलों में तत्काल पदस्थापना: पिछले 3 वर्षों से जिन 478 स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित है, वहां नियमित शिक्षकों की नियुक्ति कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जाए।
  • अवकाश नीति व गैर-व्यावसायिक कार्यों से मुक्ति: प्रतिवर्ष 20 दिवस का आकस्मिक अवकाश (CL), मेडिकल लीव, महिला प्रशिक्षकों को मातृत्व अवकाश और हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर ग्रीष्मकालीन अवकाश दिया जाए। साथ ही, प्रशिक्षकों को अन्य गैर-व्यावसायिक कार्यों में न झोंका जाए।

​व्यावसायिक प्रशिक्षक कल्याण संघ ने दो टूक कहा है कि जब तक विभागीय स्तर पर एक प्रभावी निगरानी समिति गठित कर इन मांगों का स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा का बुनियादी ढांचा सुदृढ़ नहीं हो सकता।