सौरभ चंद्राकर की वापसी से खुलेगा महादेव ऐप का राज ? CM साय बोले – प्रोटेक्शन मनी लेने वालों तक पहुंचेगी जांच

ओमान से भारत लाए गए महादेव ऐप के प्रमोटर से पूछताछ की तैयारी, मुख्यमंत्री ने CBI की कार्रवाई को बताया बड़ी सफलता

रायपुर : महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में लंबे समय से विदेश में रह रहे मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाए जाने के बाद अब जांच की दिशा पर सबकी नजरें टिक गई हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सौरभ चंद्राकर से पूछताछ में महादेव ऐप के पूरे नेटवर्क और कथित तौर पर प्रोटेक्शन मनी लेने वालों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि CBI लंबे समय से मुख्य आरोपी को विदेश से भारत लाने का प्रयास कर रही थी। अब उसकी वापसी से मामले की जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने इस कार्रवाई के लिए CBI के प्रति आभार जताते हुए इसे महत्वपूर्ण सफलता बताया।

CBI मुख्यालय से रायपुर कोर्ट ले जाने की तैयारी

CBI के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर को इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर ओमान की रॉयल ओमान पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसके बाद CBI की विशेष टीम उसे भारत लेकर आई। 2 नवंबर को उसे दिल्ली स्थित CBI मुख्यालय से रायपुर की अदालत में पेशी के लिए ले जाने की जानकारी सामने आई।

चंद्राकर दो CBI मामलों में आरोपी है, जिनमें आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की गई है।

कथित प्रोटेक्शन मनी की जांच पर मुख्यमंत्री का जोर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सौरभ चंद्राकर से पूछताछ के जरिए यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि महादेव ऐप के संचालन से जुड़े कथित नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे और किन लोगों तक प्रोटेक्शन मनी पहुंचाई जाती थी। यह जांच का अहम पहलू माना जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएंगे।

देशभर में फैले नेटवर्क का आरोप

जांच एजेंसियों के अनुसार, महादेव ऑनलाइन बुक का संचालन विदेश से किया जाता था। क्रिकेट, फुटबॉल और कार्ड गेम सहित विभिन्न गतिविधियों पर ऑनलाइन सट्टा लगाने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में फ्रेंचाइजी पैनल और शाखाओं का नेटवर्क बनाया गया था। एजेंसियों का आरोप है कि सट्टे से प्राप्त रकम को कई बैंक खातों के जरिए घुमाया जाता था और हवाला माध्यमों से विदेश भेजा जाता था।

CBI की जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि नेटवर्क को बिना बाधा संचालित करने के लिए सरकारी कर्मचारियों को कथित तौर पर प्रोटेक्शन मनी दी जाती थी। अब चंद्राकर से पूछताछ में इस पूरे आर्थिक नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों के बारे में और जानकारी मिलने की संभावना है।

जांच के अगले चरण पर टिकी निगाहें

सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद अब जांच एजेंसियां उसके बयान, वित्तीय लेनदेन और अन्य आरोपियों से जुड़े पहलुओं की पड़ताल करेंगी। मुख्यमंत्री के बयान के बाद इस मामले में कथित प्रोटेक्शन मनी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। आने वाले दिनों में पूछताछ और अदालत की कार्यवाही से इस बहुचर्चित मामले में नए तथ्य सामने आ सकते हैं।