
- 27 से 30 अक्टूबर तक राजस्व न्यायालयीन कार्यों का बहिष्कार
- मांगें पूरी न होने पर 2 नवंबर से तहसील कार्यालय में अनिश्चितकालीन तालाबंदी का ऐलान
- स्थायी तहसीलदार और पर्याप्त स्टाफ पदस्थ करने की मांग
हरदीबाजार | विनोद उपाध्याय (सेंट्रल छत्तीसगढ़): तहसीलदार हरदीबाजार का स्थानांतरण आदेश जारी होने के बावजूद उन्हें अब तक कार्यमुक्त (रिलीव) न किए जाने को लेकर अधिवक्ता संघ हरदीबाजार में गहरा आक्रोश व्याप्त है। प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये के विरोध में संघ ने चरणबद्ध आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। अधिवक्ता संघ ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि 27 से 30 अक्टूबर 2026 तक सभी अधिवक्ता राजस्व न्यायालयीन कार्यों का पूर्णतः बहिष्कार करेंगे। इसके बाद भी यदि शासन-प्रशासन ने संज्ञान नहीं लिया, तो 2 नवंबर 2026 से तहसील कार्यालय की अनिश्चितकालीन तालाबंदी की जाएगी।
राजस्व न्यायालयों के कार्य रहेंगे पूरी तरह ठप अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से संचालित होगा। बहिष्कार के तहत अधिवक्ता तहसीलदार न्यायालय तथा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व/SDO) न्यायालय से संबंधित किसी भी राजस्व न्यायिक कार्य में उपस्थित नहीं होंगे। संघ का कहना है कि तहसील कार्यालय की बदहाल कार्यप्रणाली और प्रशासनिक उदासीनता के कारण क्षेत्र के पक्षकारों व आम नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अधिवक्ता संघ की प्रमुख मांगें:
- तत्काल कार्यमुक्ति: स्थानांतरण आदेश का पालन करते हुए वर्तमान तहसीलदार को अविलंब कार्यमुक्त किया जाए।
- स्थायी पदस्थापना: तहसील कार्यालय में पूर्णकालिक, अनुभवी एवं राजस्व मामलों के जानकार स्थायी तहसीलदार की नियुक्ति हो।
- पर्याप्त स्टाफ की तैनाती: तहसील कार्यालय में लंबे समय से रिक्त पड़े कर्मचारियों के पदों को भरकर सुचारु व्यवस्था बनाई जाए ताकि आमजन के काम समय पर हो सकें।
2 नवंबर से आर-पार की लड़ाई की चेतावनी संघ ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि बहिष्कार अवधि के दौरान यदि उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं की गई, तो 2 नवंबर से तहसील कार्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा। न्यायालयीन कार्यों के ठप होने से आम जनता की परेशानियां बढ़ना तय है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन व प्रशासन की होगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस आंदोलन से पहले क्या सुधारात्मक कदम उठाता है।