10 की उम्र में सिर से उठा पिता का साया, जिम्मेदारियों ने समय से पहले बड़ा किया… आज छत्तीसगढ़ का नेतृत्व कर रहे विष्णुदेव साय

रायपुर : किसी व्यक्ति की सफलता को समझना हो तो केवल उसके वर्तमान पद को देखना पर्याप्त नहीं होता। उसके पीछे छिपे संघर्षों को जानना भी जरूरी होता है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। आज वे प्रदेश के मुखिया हैं, लेकिन इस मुकाम के पीछे एक ऐसा बचपन है, जहां उम्र छोटी थी और जिम्मेदारियां बड़ी। महज 10 वर्ष की उम्र में पिता को खोने के बाद परिस्थितियों ने उन्हें समय से पहले जीवन की वास्तविकताओं से परिचित करा दिया।

दस साल की उम्र में बदल गई जिंदगी

विष्णुदेव साय ने एक कार्यक्रम के दौरान अपने जीवन के शुरुआती संघर्षों को याद करते हुए बताया कि जब वे महज 10 वर्ष के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया था। यह वह उम्र थी जब एक बच्चे को पिता का हाथ थामकर आगे बढ़ना चाहिए, लेकिन उनके हिस्से में परिवार की चिंता और जिम्मेदारियां आ गईं।

परिवार में बड़े बेटे होने के कारण मां, दादी और छोटे भाइयों की जिम्मेदारियों को करीब से समझना पड़ा। खेती-किसानी से जुड़े परिवार में पले-बढ़े विष्णुदेव साय ने पढ़ाई के साथ जीवन की कठिन परिस्थितियों को भी देखा। कम उम्र में मिली जिम्मेदारियों ने उन्हें धैर्य, संघर्ष और परिस्थितियों का सामना करने की सीख दी।

बगिया से शुरू हुई सार्वजनिक जीवन की यात्रा

विष्णुदेव साय की राजनीति की शुरुआत किसी बड़े राजनीतिक मंच से नहीं हुई। उनकी सार्वजनिक यात्रा बगिया गांव से शुरू हुई। पंच और फिर सरपंच के रूप में उन्होंने ग्रामीणों के बीच रहकर काम किया। यही जमीनी अनुभव आगे उनके राजनीतिक जीवन की नींव बना।

इसके बाद उनका सफर अविभाजित मध्यप्रदेश की विधानसभा तक पहुंचा। राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश के बाद वे चार बार लोकसभा सांसद रहे और केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। लंबी राजनीतिक यात्रा के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला।

मुख्यमंत्री बनने के बाद योजनाओं में दिखी प्राथमिकताओं की झलक

मुख्यमंत्री बनने के बाद विष्णुदेव साय सरकार के सामने प्रदेश के अलग-अलग वर्गों की अपेक्षाओं को पूरा करने की बड़ी चुनौती थी। महिलाओं से लेकर किसानों तक, गरीब परिवारों से लेकर आदिवासी अंचलों तक और धार्मिक पर्यटन से लेकर बुनियादी सुविधाओं तक सरकार ने कई योजनाओं और पहलों को आगे बढ़ाया।

महतारी वंदन योजना : महिलाओं को आर्थिक संबल

महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देने वाली महतारी वंदन योजना सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल हुई। योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता दी जाती है। 2026-27 के बजट में इसके लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

इस योजना को सरकार की महिला-केंद्रित नीतियों के प्रमुख हिस्से के रूप में देखा गया है। आर्थिक सहायता सीधे महिलाओं तक पहुंचने से घरेलू जरूरतों और व्यक्तिगत आर्थिक निर्णयों में उन्हें अतिरिक्त संबल मिलता है।

कृषक उन्नति योजना : किसानों को आर्थिक मजबूती

छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में कृषि की बड़ी भूमिका है। ऐसे में कृषक उन्नति योजना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में रही। किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने और कृषि क्षेत्र को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से इस योजना को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया। 2025-26 के बजट में इसके लिए 10 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था।

किसान केंद्रित नीतियां विष्णुदेव साय के ग्रामीण और कृषि पृष्ठभूमि से भी एक स्वाभाविक जुड़ाव दिखाती हैं। जिस परिवेश में उन्होंने खुद खेती-किसानी को करीब से देखा, उसी प्रदेश में किसानों से जुड़ी योजनाएं उनके कार्यकाल का अहम हिस्सा बनी हैं।

प्रधानमंत्री आवास : गरीब परिवारों के पक्के घर का सपना

गरीब परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने की दिशा में प्रधानमंत्री आवास योजना पर भी सरकार ने जोर दिया। 2025-26 के बजट में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लिए 8,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था।

पक्का घर किसी गरीब परिवार के लिए केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा सपना होता है। ग्रामीण परिवेश से आने वाले नेतृत्व के लिए इस तरह की बुनियादी जरूरतों का महत्व और भी बड़ा हो जाता है।

रामलला दर्शन योजना : आस्था को यात्रा से जोड़ा

छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं को अयोध्या में भगवान श्रीराम के दर्शन कराने के उद्देश्य से रामलला दर्शन योजना शुरू की गई। इसके माध्यम से प्रदेश के लोगों को अयोध्या धाम की यात्रा और रामलला के दर्शन का अवसर उपलब्ध कराने की पहल की गई।

यह योजना सरकार की धार्मिक और सांस्कृतिक पहलों में प्रमुख रही और छत्तीसगढ़ से अयोध्या के बीच आस्था के जुड़ाव को एक संस्थागत रूप देने का प्रयास माना गया।

नियद नेल्लानार : बस्तर के गांवों तक विकास की पहुंच

आदिवासी और दूरस्थ इलाकों में विकास को गति देने के लिए नियद नेल्लानार योजना पर भी सरकार ने जोर दिया। योजना का उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं की पहुंच बढ़ाना है।

बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विकास को केवल सड़क और भवन तक सीमित न रखकर लोगों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाने की कोशिश को इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया।

सत्ता के शीर्ष तक पहुंचे, मगर गांव की सादगी नहीं छोड़ी

राजनीतिक जीवन में ऊंचे पद हासिल करने के बावजूद विष्णुदेव साय के व्यक्तित्व में ग्रामीण परिवेश की सहजता दिखाई देती है। उनके जीवन की शुरुआत जिस वातावरण में हुई, उसकी छाप उनके व्यवहार में आज भी दिखाई देती है।

संघर्षों से निकले व्यक्ति के लिए जीवन की प्राथमिकताएं केवल पद और प्रतिष्ठा तक सीमित नहीं रहतीं। कम उम्र में परिवार की परिस्थितियों को देखने वाला व्यक्ति बुनियादी जरूरतों और आर्थिक सुरक्षा के महत्व को अलग नजर से समझता है।

पंच से मुख्यमंत्री तक : जिम्मेदारियां बदलती गईं, सफर जारी रहा

विष्णुदेव साय की यात्रा को देखें तो जिम्मेदारियों का दायरा लगातार बढ़ता गया। गांव में पंच की जिम्मेदारी से शुरुआत हुई, फिर सरपंच, विधायक, सांसद, केंद्रीय मंत्री और अंततः मुख्यमंत्री का दायित्व मिला। हर पड़ाव पर उनके सामने जिम्मेदारी का आकार पहले से बड़ा होता गया।

आज वही जिम्मेदारी पूरे छत्तीसगढ़ की है। यही वजह है कि उनके जीवन के शुरुआती संघर्षों को उनके वर्तमान नेतृत्व से अलग करके देखना आसान नहीं है। बचपन में परिवार की चिंता से शुरू हुआ सफर आज प्रदेश के करोड़ों लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं तक पहुंच चुका है।

जिस संघर्ष ने नेतृत्व की नींव रखी

10 वर्ष की उम्र में पिता को खोना किसी भी बच्चे के लिए बेहद कठिन अनुभव होता है। विष्णुदेव साय के मामले में यह घटना केवल व्यक्तिगत दुख तक सीमित नहीं रही। इसके बाद आने वाली जिम्मेदारियों ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। परिवार की परिस्थितियों ने उन्हें धैर्य रखना सिखाया और ग्रामीण जीवन ने उन्हें जमीन से जोड़े रखा।

 

समय के साथ यही अनुभव उनके सार्वजनिक जीवन में दिखाई देने लगा। लोगों के बीच रहकर काम करने से लेकर बड़े राजनीतिक दायित्वों तक पहुंचने की उनकी यात्रा बताती है कि नेतृत्व की बुनियाद कई बार बड़े मंचों पर नहीं, बल्कि संघर्षों के बीच तैयार होती है।

आज विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ की कमान संभाल रहे हैं। लेकिन उनकी कहानी केवल मुख्यमंत्री बनने की कहानी नहीं है। यह उस बच्चे की कहानी है, जिसने कम उम्र में पिता को खोया, परिस्थितियों के बीच खुद को संभाला, जिम्मेदारियों को स्वीकार किया और गांव की जमीन से निकलकर प्रदेश के नेतृत्व तक का सफर तय किया।

मुख्यमंत्री बनने के बाद महिलाओं के लिए महतारी वंदन, किसानों के लिए कृषक उन्नति, गरीब परिवारों के लिए आवास, श्रद्धालुओं के लिए रामलला दर्शन और आदिवासी अंचलों के लिए नियद नेल्लानार जैसी पहलों ने उनके कार्यकाल को अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाने वाला आयाम दिया है।

दस साल की उम्र में पिता को खोने वाले उस बच्चे से लेकर आज छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री तक की यह यात्रा सिर्फ सत्ता तक पहुंचने की कहानी नहीं है। यह संघर्ष से बने उस नेतृत्व की कहानी है, जिसमें गांव की मिट्टी, परिवार की जिम्मेदारी और लोगों के बीच काम करने का अनुभव आज भी कहीं न कहीं दिखाई देता है।