कटघोरा : जिला बनने की दहलीज पर कटघोरा या सिर्फ प्रशासनिक ‘प्रयोगशाला’? बड़े पदों पर IAS अफसरों की तैनाती से सियासी व जनचर्चा गरमाई

विशेष रिपोर्ट | कटघोरा कोरबा जिले की सबसे अहम और पुरानी तहसीलों में शुमार कटघोरा इन दिनों प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा के केंद्र में है। वजह है—एक ही अनुविभाग में एक साथ तीन-तीन भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों की मौजूदगी। अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM), नगर पालिका परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) और जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO)—तीनों ही शीर्ष प्रशासनिक कुर्सियों पर IAS कैडर के अधिकारियों की तैनाती ने आम जनता और विश्लेषकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। क्षेत्र में यह सवाल तेजी से तैर रहा है कि क्या दशकों पुरानी “कटघोरा जिला बनाओ” मांग अब हकीकत बनने जा रही है, या फिर यह केवल युवा अफसरों की फील्ड ट्रेनिंग और प्रशासनिक कसावट का एक जरिया भर है?

शीर्ष कुर्सियों पर IAS अफसरों की तिकड़ी: एक नजर

कटघोरा में प्रशासनिक नियंत्रण की बागडोर जिन अधिकारियों के हाथों में है, उनका प्रोफाइल प्रशासनिक ढांचे की गंभीरता को दर्शाता है:

  1. एसडीएम (SDM) – IAS विपिन दुबे (2024 बैच): छत्तीसगढ़ कैडर के 2024 बैच के सीधे भर्ती (Direct Recruit) आईएएस अधिकारी विपिन दुबे अगस्त 2026 से कटघोरा अनुविभाग के राजस्व व दंडाधिकारीय कार्यों का नेतृत्व कर रहे हैं। इससे पहले सहायक कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके विपिन दुबे के पास अनुविभाग के समग्र प्रशासन की कमान है।
  2. नगर पालिका सीएमओ (CMO) – IAS इशांत जायसवाल (2025 बैच): कोरबा जिले में सहायक कलेक्टर के पद पर पदस्थ 2025 बैच के आईएएस अधिकारी इशांत जायसवाल को नगर पालिका परिषद कटघोरा के सीएमओ का जिम्मा सौंपा गया है। विधिक पृष्ठभूमि (B.A. LL.B.) से आने वाले युवा अधिकारी के नगरीय प्रशासन संभालने से नगर विकास और राजस्व प्रबंधन में कड़े सुधारों की उम्मीद की जा रही है।
  3. जनपद पंचायत सीईओ (CEO) – IAS तरुण किरण (2021 बैच): राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस संवर्ग में पदोन्नत 2021 बैच के अनुभवी अधिकारी तरुण कुमार किरण को कटघोरा जनपद पंचायत के सीईओ पद की जिम्मेदारी दी गई है। राज्य की जमीनी प्रशासनिक व्यवस्था और ग्रामीण विकास योजनाओं का लंबा अनुभव रखने वाले अधिकारी की ग्रामीण क्षेत्र के शीर्ष पद पर मौजूदगी व्यवस्था को सीधा संदेश देती है।

कयास नंबर 1: क्या जिला गठन की औपचारिक तैयारी शुरू हो चुकी है?

कटघोरा को स्वतंत्र राजस्व जिला बनाने की मांग कई दशकों से क्षेत्र की प्रमुख जन-आकांक्षाओं में से एक रही है। क्षेत्रफल, जनसंख्या, राजस्व अर्जन, औद्योगिक विस्तार और भौगोलिक दृष्टि से कटघोरा जिला बनने के सभी आवश्यक मापदंड पूरे करता है।

  • प्रशासनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर की जमीन तैयार करना: जानकारों का मानना है कि किसी भी नए जिले की घोषणा से पूर्व वहां के प्रशासनिक ढांचे, राजस्व अभिलेखों के डिजिटाइजेशन, सीमांकन और सरकारी कार्यप्रणाली को सुदृढ़ किया जाता है। एक साथ अनुविभाग, नगर पालिका और जनपद स्तर पर अनुभवी व नीतिगत निर्णय लेने में सक्षम अफसरों का बैठना इस बात का संकेत हो सकता है कि शासन स्तर पर फाइलों को गति दी जा रही है।
  • जन-आकांक्षा और राजनीतिक दबाव: आगामी चुनावी और क्षेत्रीय समीकरणों को देखते हुए कटघोरा को जिला घोषित करने का दबाव लगातार सरकार पर है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि शासन को केवल रूटीन काम चलाना होता तो सामान्यतः राज्य प्रशासनिक सेवा (डिप्टी कलेक्टर स्तर) के अधिकारी ही इन पदों पर पर्याप्त थे।

कयास नंबर 2: क्या यह केवल ‘फील्ड ट्रेनिंग’ और कसावट का प्रयास है?

दूसरी तरफ, प्रशासनिक हलकों का एक वर्ग इसे जिला बनने का पक्का संकेत मानने से बच रहा है। उनका तर्क है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से नियमित प्रशिक्षण प्रोटोकॉल और प्रशासनिक अनुशासन का हिस्सा है:

  • आईएएस प्रोबेशनर्स की जमीनी ट्रेनिंग: नियमानुसार सहायक कलेक्टर्स और युवा आईएएस अधिकारियों को स्वतंत्र प्रभार देने से पूर्व ब्लॉक, तहसील और स्थानीय निकायों का व्यावहारिक अनुभव (Independent Charge of Sub-Division, Block & Municipality) दिया जाता है। कटघोरा कोरबा जिले की सबसे बड़ी और जटिल तहसील है, जहां खनन, वन भूमि, शहरीकरण और ग्रामीण पंचायतें एक साथ मौजूद हैं। ऐसे में युवा अधिकारियों को विविध कार्यक्षेत्र का अनुभव कराने के लिए कटघोरा सबसे उपयुक्त फील्ड माना जाता है।
  • भ्रष्टाचार और लेटलतीफी पर कड़ा प्रहार: कटघोरा क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण, पुनर्वास, मुआवजा वितरण, नगरीय निर्माण और पंचायत फंड से जुड़े कई संवेदनशील मामले समय-समय पर सुर्खियों में रहे हैं। निचले स्तर की प्रशासनिक ढिलाई और भ्रष्टाचार की शिकायतों को खत्म करने के लिए शासन ने सीनियर और युवा आईएएस अफसरों का कॉम्बिनेशन बैठाकर कड़ा अनुशासन लागू करने का प्रयास किया है।

कटघोरा की जनता क्या सोच रही है?

स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और अधिवक्ताओं में इस बदलाव को लेकर मिला-जुला कौतूहल है। नगर के वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में कटघोरा को जिला बनाने की मंशा रखती है, तो यह स्वागतयोग्य कदम है। इससे क्षेत्र के लोगों को जिला मुख्यालय (कोरबा) के लंबे चक्करों से मुक्ति मिलेगी।

वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना है कि कटघोरा को सिर्फ आईएएस अफसरों का “ट्रेनिंग सेंटर” बनाकर न छोड़ दिया जाए, जहां अधिकारी आएं, 6 महीने से 1 साल का अनुभव लें और फिर राजधानी या बड़े जिलों में स्थानांतरित हो जाएं। जनता चाहती है कि अफसरों की इस मजबूत टीम का सीधा लाभ लंबित विकास कार्यों, सड़कों की बदहाली, प्रदूषण नियंत्रण और बुनियादी नागरिक सुविधाओं को सुधारने में दिखे।

फिलहाल कटघोरा की तीनों प्रमुख प्रशासनिक कुर्सियों पर आईएएस अधिकारियों की कार्यशैली ने दफ्तरों में काम की रफ्तार और अनुशासन तो बढ़ा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह असाधारण प्रशासनिक जमावड़ा कटघोरा के माथे पर ‘नए जिले’ का ताज सजाने की पूर्व-तैयारी साबित होता है या फिर यह केवल लालफीताशाही दुरुस्त करने की रूटीन प्रशासनिक कवायद बनकर रह जाएगा।