रावणभाठा दशहरा उत्सव को CM साय की बड़ी सौगात, हर साल मिलेंगे 10 लाख रुपये; 170 साल पुरानी परंपरा को मिलेगा संबल

रायपुर | सेंट्रल छत्तीसगढ़। राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक रावणभाठा मैदान में आयोजित दशहरा उत्सव को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री ने इस पारंपरिक आयोजन के लिए प्रतिवर्ष 10 लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा की। करीब 170 साल पुरानी इस परंपरा के बीच मुख्यमंत्री ने कहा कि विजयादशमी केवल रावण के पुतले का दहन करने का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर मौजूद बुराइयों पर विजय प्राप्त करने का अवसर भी है। उन्होंने प्रदेशवासियों से सत्य, सेवा, सुशासन और जनकल्याण के रास्ते पर चलते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया।

170 साल पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी के ऐतिहासिक रावणभाठा मैदान में आयोजित विजयादशमी उत्सव में शामिल हुए और प्रदेशवासियों को दशहरा पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि रावणभाठा का दशहरा उत्सव छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और सामूहिक आस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक है। पीढ़ियों से यहां यह आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ होता आ रहा है।

मुख्यमंत्री ने आयोजन समिति और इस परंपरा को जीवित रखने वाले लोगों की सराहना करते हुए कहा कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करना सभी की जिम्मेदारी है। हर वर्ष 10 लाख रुपये देने की घोषणा को इसी दिशा में उठाए गए कदम के रूप में देखा जा रहा है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी इस उत्सव को लगभग 170 वर्ष पुरानी गौरवशाली परंपरा बताया और कहा कि इसका आयोजन दूधाधारी मठ द्वारा प्रतिवर्ष किया जाता है।

केवल पुतला नहीं, अपने भीतर की बुराइयों को भी जलाएं

विजयादशमी के संदेश पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हर साल रावण का पुतला जलाया जाता है, लेकिन इस पर्व की वास्तविक सार्थकता तब है, जब व्यक्ति अपने भीतर मौजूद काम, क्रोध, मद और लोभ जैसी बुराइयों पर भी विजय प्राप्त करे। उन्होंने कहा कि दशहरा आत्ममंथन करने और अपने जीवन में सद्गुणों को अपनाने का अवसर है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रभु श्रीराम का जीवन सत्य, धैर्य, साहस, त्याग और न्याय के प्रति अटूट निष्ठा की प्रेरणा देता है। रावण के पास विशाल सेना और अपार सामर्थ्य था, लेकिन भगवान श्रीराम ने धर्मबल और दृढ़ संकल्प के सहारे विजय प्राप्त की। यह संदेश आज भी प्रासंगिक है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और न्याय का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।

छत्तीसगढ़ को बताया प्रभु श्रीराम का ननिहाल

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का प्रभु श्रीराम से गहरा आत्मीय संबंध है। यह प्रदेश माता कौशल्या का मायका और भगवान श्रीराम का ननिहाल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने छत्तीसगढ़ की धरती पर समय बिताया था। इसी कारण प्रदेश की लोकसंस्कृति और जनजीवन में प्रभु श्रीराम के प्रति विशेष आस्था दिखाई देती है।

उन्होंने अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा को देश के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक इतिहास का महत्वपूर्ण अवसर बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की श्रीरामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के माध्यम से अब तक 49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को रामलला के दर्शन का अवसर मिला है।

ऑपरेशन सिंदूर और विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति का उल्लेख करते हुए ऑपरेशन सिंदूर को देश के साहस और संकल्प का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र को आतंकवाद तथा अन्याय जैसी बुराइयों के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए।

उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि विकास के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों को भी सुरक्षित रखा जाए। सत्य, सेवा, सुशासन और जनकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए समृद्ध, सशक्त और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सभी अपनी भागीदारी निभाएं।

कार्यक्रम में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर विधायक सुनील सोनी, अंजय शुक्ला, सुभाष तिवारी, मनोज वर्मा, सुशील ओझा, उमेश गुप्ता, संजू नारायण, सार्वजनिक दशहरा उत्सव समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।