
खास रिपोर्ट (गेवरा/कोरबा): क्या एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदान अब गुंडागर्दी का अखाड़ा बन चुकी है? गेवरा खदान के quarry सेक्शन से आई एक खबर ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। यहाँ अनुशासन और सुरक्षा के दावों के बीच एक बुजुर्ग कर्मचारी को लहूलुहान कर दिया गया, और वजह थी—महज ‘साइड न मिलना’।
अहंकार की भेंट चढ़ी इंसानियत
घटना तब शुरू हुई जब डंपर ऑपरेटरों के बीच रास्ता देने को लेकर मामूली कहासुनी हुई। लेकिन यह विवाद तब खूनी संघर्ष में बदल गया जब प्रियेस दुबे, शिव कुमार और उनके साथियों ने अपना आपा खो दिया। इन रसूखदार ऑपरेटरों ने 53 वर्षीय बुजुर्ग बहोरन सिंह (निवासी ढुरेना) को घेर लिया। आरोपियों ने बुजुर्ग की उम्र का भी लिहाज नहीं किया और उन्हें जमीन पर पटक कर बेरहमी से लात-घूंसों से पीटना शुरू कर दिया।
मौत के साए में ड्यूटी?
पीड़ित बहोरन सिंह के सीने में गंभीर अंदरूनी चोटें आई हैं। हमला इतना भीषण था कि मौके पर मौजूद अन्य कर्मचारी सहम गए। घायल बुजुर्ग को तत्काल NCH अस्पताल पहुँचाया गया है, जहाँ वे जिंदगी और दर्द से जूझ रहे हैं। साथी कर्मचारियों का कहना है कि आरोपियों ने न केवल पीटा, बल्कि सरेआम जान से मारने की धमकी भी दी।
सिस्टम की सुस्ती पर खड़े हुए सवाल
इस पूरी घटना में सबसे चौंकाने वाला पहलू प्रबंधन (Management) का रवैया है। घटना के घंटों बीत जाने के बाद भी हमलावर बेखौफ घूम रहे हैं।
- काम ठप, पर कार्यवाही शून्य: आक्रोशित कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर विरोध जताया है।
- ट्रांसफर की गूँज: शिफ्ट इंचार्ज बीर सिंह और हमलावर ऑपरेटरों को तत्काल कंपनी से बाहर (ट्रांसफर) करने की मांग उठ रही है।
- मैनेजमेंट की चुप्पी: आखिर मैनेजमेंट किस दबाव में इन ‘गुंडा’ तत्वों पर कार्यवाही करने से कतरा रहा है?
बड़ा सवाल: अगर खदान के अंदर बुजुर्ग सुरक्षित नहीं हैं, तो क्या कर्मचारी अपनी जान हथेली पर रखकर काम करेंगे? क्या पुलिस और उच्च अधिकारी इस मामले में हस्तक्षेप कर पीड़ित को न्याय दिलाएंगे?