
कटघोरा, ( सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ )कोरबा / आशुतोष शर्मा: एक ओर जहाँ आम जनता महंगाई की मार झेल रही है, वहीं दूसरी ओर कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र में गैस सिलेंडर की कालाबाजारी ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि जरूरतमंद परिवारों को गैस के लिए हफ्तों इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि रसूखदारों और होटल संचालकों को ऊंची कीमतों पर धड़ल्ले से गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
आम जनता बेहाल, ₹1500 में ‘ब्लैक’ में मिल रहा सिलेंडर
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि गैस एजेंसियों द्वारा कृत्रिम अभाव पैदा किया गया है। जरूरतमंद उपभोक्ता जब एजेंसी पहुँचते हैं, तो उन्हें “स्टॉक नहीं है” कहकर वापस भेज दिया जाता है। वहीं, पर्दे के पीछे इसी सिलेंडर को ₹1500 तक की मनमानी कीमत पर बेचा जा रहा है।
होटलों और गुमटियों में धड़ल्ले से हो रहा घरेलू गैस का उपयोग
नियमों के मुताबिक, होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में नीले रंग के कमर्शियल सिलेंडर का उपयोग होना चाहिए। लेकिन कटघोरा की स्थिति इसके उलट है। यहाँ:
- गैस एजेंसियों द्वारा सीधे तौर पर होटलों, गुमटियों और ठेलों पर घरेलू सिलेंडरों की सप्लाई की जा रही है।
- अधिक मुनाफे के लालच में एजेंसियां घरेलू कोटे का सिलेंडर व्यावसायिक उपयोग के लिए बेच रही हैं।
- सुरक्षित मानकों को ताक पर रखकर छोटे ठेलों पर अवैध रूप से गैस रिफिलिंग का खेल भी चल रहा है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
शहर के मुख्य बाजारों और ढाबों में खुलेआम घरेलू सिलेंडरों का उपयोग हो रहा है, लेकिन खाद्य विभाग और स्थानीय प्रशासन ने अब तक इस पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया है। प्रशासन की इस ‘मौन’ सहमति ने कालाबाजारियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं। जनता अब सवाल उठा रही है कि क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
“हमें गैस के लिए चक्कर काटने पड़ रहे हैं, चूल्हा फूंकने की नौबत आ गई है। लेकिन पैसे फेंको तो होटल वालों को तुरंत सिलेंडर मिल जाता है। प्रशासन को इस पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।” — एक स्थानीय पीड़ित उपभोक्ता
क्या कार्रवाई होगी?
क्षेत्र की जनता ने जिला कलेक्टर और खाद्य विभाग से मांग की है कि कटघोरा की गैस एजेंसियों के स्टॉक की जांच की जाए और होटलों में औचक निरीक्षण कर अवैध रूप से उपयोग किए जा रहे सिलेंडरों को जब्त किया जाए।