कटघोरा में ‘इंदौर’ जैसी त्रासदी की आहट: आहिरन नदी में घुल रहा 2018 से बना ‘सरकारी जहर’, एनीकट के बंद गेटों ने रोका मौत का पानी

कटघोरा ( सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ ): कटघोरा की जीवनदायिनी आहिरन नदी आज एक “जहरीले नाले” में तब्दील हो चुकी है। साल 2018 में अंसारी घर से लेकर आहिरन नदी तक करोड़ों की लागत से नालों का निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का पैसा और योजना फाइलों में ही दफन होकर रह गई। नतीजा यह है कि आज 10 से ज्यादा गांवों के लोग इस प्रदूषित पानी के कारण नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। प्रशासन की यह लापरवाही कभी भी इंदौर जैसी बड़ी जल-विषाक्त घटना को दोहरा सकती है।

एनीकट बना आफत: रुका हुआ पानी उगल रहा बदबू

​आमाखोखरा, कटघोरा और कसानिया में बने एनीकट ने समस्या को कई गुना बढ़ा दिया है। शहर का पूरा सीवरेज इस एनीकट के कारण एक ही जगह जमा हो गया है।

  • सिंचाई विभाग की बेरुखी: नगर पालिका के जनप्रतिनिधि राज जायसवाल ने बताया कि सिंचाई विभाग (Irrigation) को बार-बार पत्र लिखकर एनीकट के गेट खोलने का आग्रह किया गया है ताकि गंदा पानी आगे बह सके, लेकिन विभाग कान में तेल डालकर बैठा है।
  • CMO का पक्ष: नगर पालिका सीएमओ का कहना है कि STP प्लांट के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन जब तक गेट नहीं खुलते, तब तक कसानिया वासियों को बदबू से निजात मिलना मुश्किल है।

जमीन के नीचे पहुंचा जहर: कुओं व बोर में आ रहा नाली का पानी

​प्रदूषण अब सिर्फ नदी की सतह तक सीमित नहीं है। कसानिया वार्ड नंबर 15 (कुआं . बोर) सहित कई क्षेत्रों के कुओं में गंदे पानी का रिसाव शुरू हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि एनीकट के कारण पानी का भराव होने से यह गंदा पानी जमीन में रिसकर पेयजल स्रोतों को जहरीला बना रहा है।

किसानों की मजबूरी और 10 गांवों का निस्तार ठप

  • पटेल समाज का संकट: नदी किनारे सब्जी बाड़ी लगाने वाले पटेल समाज के लोग इसी गंदे पानी से सिंचाई करने को मजबूर हैं, जिससे जहरीली सब्जियां बाजार तक पहुंच रही हैं।
  • निस्तार बंद: लगभग 10 गांवों के ग्रामीण जो नहाने, कपड़े धोने और मवेशियों के लिए नदी पर निर्भर थे, अब वहां जाने से भी कतरा रहे हैं। नदी का पानी छूने मात्र से चर्म रोग का खतरा बढ़ गया है।

भ्रष्टाचार की बू: 2018 से अब तक क्या हुआ?

​स्थानीय लोगों का बड़ा सवाल यह है कि 2018 में जब नालों का निर्माण हुआ, तो उस समय STP प्लांट और सफाई की व्यवस्था के लिए आवंटित बजट कहां गया? ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत के कारण आज पूरी आबादी के स्वास्थ्य को दांव पर लगा दिया गया है।

प्रमुख बिंदु

  • ज्वलंत समस्या: 10 गांवों की आबादी प्रभावित, नदी का निस्तार पूरी तरह ठप।
  • महामारी का डर: कुओं में रिसाव से कभी भी फैल सकती है बड़ी बीमारी।
  • मांग: सिंचाई विभाग तुरंत एनीकट के गेट खोले और सरकार तत्काल STP प्लांट का निर्माण शुरू करे।