
कोरबा (सेन्ट्रल छत्तीसगढ़) : केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान’ (PM-JANMAN) के तहत बन रही सड़कों में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। कटघोरा-अम्बिकापुर मुख्य मार्ग से ढिबरीपारा तक बनाई जा रही 2.50 किमी लंबी सड़क निर्माण में गुणवत्ता के सारे मानकों को ताक पर रख दिया गया है।

हाथ से उखड़ रहा डामर, भ्रष्टाचार उजागर
जमीनी हकीकत यह है कि नई सड़क बनाने के नाम पर पुरानी सड़क के ऊपर ही डामर की एक बेहद पतली लेयर बिछा दी गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क की गुणवत्ता इतनी घटिया है कि डामर की परत हाथ से उखड़ने लगी है। निर्माण में प्रयुक्त सामग्री और तकनीक की पोल सड़क की पहली लेयर ने ही खोल दी है।
कागजों पर ‘मजबूत’ सड़क, हकीकत में सिर्फ ‘पेंट’
सूचना पटल (Board) के अनुसार इस सड़क के लिए ₹1,51,96,000 की भारी-भरकम राशि स्वीकृत है। बोर्ड पर जो तकनीकी ढांचा (Cross Section) दिखाया गया है, उसमें कई परतों का उल्लेख है:
- GSB और WMM की परतें: लगभग 300mm की मजबूती होनी चाहिए।
- हकीकत: पुरानी सड़क को बिना खोदे या पर्याप्त बेस तैयार किए, सीधे उस पर ‘टायरिंग’ कर दी गई है।
- सामग्री की चोरी: बोर्ड पर 14 टन बिटुमिन (VG-30) और हजारों लीटर प्राइमर/टैक कोट का उल्लेख है, लेकिन मौके पर इसकी आधी मात्रा भी इस्तेमाल होती नहीं दिख रही।
बोर्ड पर करोड़ों का हिसाब, जमीन पर धूल और मिट्टी
योजना के सूचना पटल के अनुसार, इस 2.50 किमी लंबी सड़क के लिए भारी मात्रा में सामग्री का प्रावधान है:
14 टन बिटुमिन (डामर) और हजारों लीटर इमल्शन का पैसा निकाला जाना है। लेकिन मौके की स्थिति देखकर साफ पता चलता है कि ठेकेदार और विभाग की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की निर्माण सामग्री को डकार लिया गया है। पुरानी सड़क को ही नई बताकर शासन को चूना लगाया जा रहा है।
788 ट्रक मिट्टी कार्य और 97 ट्रक दानेदार उप-आधार का दावा किया गया है।
- योजना का नाम: PM-JANMAN (प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना)।
- लागत: ₹1.51 करोड़ से अधिक।
- ठेकेदार का नाम: मेसर्स एम.एस. कंस्ट्रक्शन, रायपुर।
- बड़ा फर्जीवाड़ा: नई सड़क बनाने के बजाय पुरानी सड़क को ही चमकाकर बजट ठिकाने लगाने की कोशिश।
- अधिकारियों की चुप्पी: कार्यपालन अभियंता और परियोजना क्रियान्वयन इकाई की निगरानी पर बड़े सवाल।
आदिवासी विकास के हक पर डाका
यह सड़क ढिबरीपारा जैसी विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) वाली बस्ती के लिए बनाई जा रही है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में विकास कार्यों में इस स्तर की लापरवाही प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाती है। करोड़ों की यह सड़क पहली बारिश में ही बह जाने की कगार पर है।
जांच की मांग
ग्रामीणों ने इस मामले की क्वालिटी कंट्रोल (QC) और उच्च स्तरीय तकनीकी जांच की मांग की है। सड़क के सैंपल लेकर लैब भेजने और दोषी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की मांग तेज हो गई है। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह करोड़ों की सड़क मानसून की पहली फुहार भी नहीं झेल पाएगी।
जिम्मेदार कौन?
यह कार्य छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण की देखरेख में मेसर्स एम.एस. कंस्ट्रक्शन, रायपुर द्वारा किया जा रहा है। इतनी घटिया गुणवत्ता के बावजूद विभाग के इंजीनियरों द्वारा कार्य को हरी झंडी देना उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
“जब करोड़ों का बजट स्वीकृत है, तो पुरानी सड़क पर केवल एक लेयर क्यों? क्या अधिकारी और ठेकेदार मिलकर जनता की गाढ़ी कमाई का बंदरबांट कर रहे हैं?” — स्थानीय ग्रामीण